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गुना: डामर प्लांट का जहर, बच्चों ने विधायक से लगाई मदद की गुहार

गुना जिले के बरसाती गांव में डामर प्लांट से फैल रहे जहरीले धुएं से ग्रामीण परेशान हैं। बच्चों ने वीडियो कॉल कर विधायक से प्लांट...

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•संवाददाता: राजा हतम वेग
गुना: डामर प्लांट का जहर, बच्चों ने विधायक से लगाई मदद की गुहार

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 11 अक्टूबर 2026

गुना जिले के बरसाती गांव में एक डामर प्लांट से निकलने वाले अत्यधिक प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। गुना-फतेहगढ़ मार्ग पर स्थित इस प्लांट से उत्सर्जित होने वाला जहरीला धुआं आसपास के कई गांवों में फैल रहा है, जिससे हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है, और क्षेत्र में विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

ग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदूषण का स्तर इतना अधिक हो गया है कि घरों की बाहरी दीवारों और छतों पर रखे पानी के टैंकों पर भी डामर की परतें जमने लगी हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।

बच्चों ने की विधायक से अपील

प्रशासन की उदासीनता के बीच, गांव के बच्चों ने स्वयं इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाया है। उन्होंने बमोरी के विधायक से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क साधा है। बच्चों ने रोते हुए विधायक से गुहार लगाई है कि इस जानलेवा डामर प्लांट को तत्काल प्रभाव से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे स्वच्छ हवा में सांस ले सकें और उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहे गंभीर नकारात्मक प्रभावों से निजात पा सकें।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठते सवाल

यह घटना ठेकेदार की मनमानी का पहला मामला नहीं है। इससे पहले, इसी ठेकेदार पर कुड़का गांव के ग्रामीणों ने अवैध खनन के गंभीर आरोप भी लगाए थे। प्रशासन की इस मामले में सुस्त कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की इस मार्मिक गुहार पर शासन-प्रशासन कब और क्या कदम उठाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस प्रदूषित वातावरण से मुक्ति की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के कारण उन्हें मजबूरन जहरीली हवा में रहना पड़ रहा है। प्रभावित ग्रामीण अब ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप की आशा कर रहे हैं ताकि भविष्य में उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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