ग्राम पंचायत बरोही में भ्रष्टाचार: साक्ष्य मिटाने में जुटे सरपंच-सचिव
भिंड जिले की ग्राम पंचायत बरोही में फर्जी मस्टर रोल और फिनो बैंक खातों के अवैध संचालन का मामला अब कानूनी रूप ले चुका है। साक्ष्य मिटाने के लिए सरपंच-सचिव जेसीबी का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं आरटीआई दबाने के खिलाफ भोपाल में प्रथम अपील दर्ज कराई गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | 4 अगस्त 2026
जनपद पंचायत अटेर की ग्राम पंचायत बरोही में विकास कार्यों में अनियमितताएं और फर्जी मस्टर रोल के इस्तेमाल का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी दबाने और कथित तौर पर करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोपों के बीच, ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच आकाश सोनी और तत्कालीन पंचायत सचिव पर कानूनी कार्रवाई और जेल जाने के डर से मौके पर जमीनी साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में ऑन-रिकॉर्ड वीडियो सबूत भी मौजूद बताए जा रहे हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब राष्ट्रपति सचिवालय ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय मंत्रालय को तलब किया, जिससे स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता, ग्राम बरोही के सामाजिक कार्यकर्ता आलोक पराशर, ने स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने पर 29 जुलाई 2026 को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल में प्रथम अपील दर्ज कराई है।
आरटीआई दबाने के खिलाफ प्रथम अपील
सामाजिक कार्यकर्ता और विधिक प्रतिनिधि आलोक पराशर के अनुसार, 2022 से 2026 तक की अवधि में गरीब महिलाओं के नाम पर फिनो बैंक खाते खोलकर उनके एटीएम और सिम कार्ड पर कथित तौर पर चार साल तक कब्जा रखा गया और इस दौरान करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। पराशर ने पूर्व में सीईओ जनपद अटेर, सतर्कता आयोग, पुलिस अधीक्षक भिंड और कलेक्टर भिंड को भी शिकायती पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई कानून के तहत जानकारी प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करने पर उन्होंने 29 जुलाई को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल में विधिवत प्रथम अपील दायर की है।
तत्काल एफआईआर और फोरेंसिक ऑडिट की मांग
विधिक प्रतिनिधि आलोक पराशर ने मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेशों के तहत वर्तमान सरपंच आकाश सोनी, तत्कालीन सचिव और फिनो बैंक एजेंट पर तत्काल नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की है। पराशर ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर पुलिस-प्रशासन द्वारा नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो प्राप्त डाक रसीदों, सरकारी पावतियों और वीडियो साक्ष्यों के साथ यह मामला सीधे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा।
