गोरझामर में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कलेक्टर से जांच की मांग
सागर जिले के गोरझामर क्षेत्र में बिना वैध डिग्री के अस्पताल चलाने वाले कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर से तत्काल जांच...

देवरी सागर | संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | 19 अक्टूबर 2026
सागर जिले की देवरी तहसील के गोरझामर क्षेत्र में बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय डिग्री के कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा अस्पताल संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने इन चिकित्सकों पर मरीजों को गंभीर खुराक के इंजेक्शन, ड्रिप और अन्य दवाएं देने का आरोप लगाया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह मामला तब और अधिक संवेदनशील हो गया जब पत्रकारों ने इन कथित डॉक्टरों से उनकी शैक्षणिक योग्यताओं के बारे में पूछताछ की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डॉ. टीके विश्वास और डॉ. मजूमदार नामक व्यक्तियों ने स्वीकार किया है कि उनके पास कोई डिग्री नहीं है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वे देवरी ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) की अनुमति से अस्पताल चला रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी संकेत दिया, जिससे यह आशंका प्रबल होती है कि अवैध चिकित्सा कार्य को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि देवरी ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, जिला स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के स्तर पर गंभीर चूक हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना उचित योग्यता वाले व्यक्तियों द्वारा उपचार किया जाना स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आरोप है कि इन कथित चिकित्सकों द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से भारी खुराक वाले इंजेक्शन और ड्रिप दी जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
गोरझामर क्षेत्र में बिना किसी मान्य चिकित्सकीय डिग्री के इलाज करने वाले कथित झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध स्थानीय निवासियों ने जांच की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। बिना उचित डिग्री के मरीजों का इलाज करने के आरोप, यदि सत्य साबित होते हैं, तो यह न केवल इन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को बल देता है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी होनी चाहिए और वे समय रहते उचित कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।
कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए, गोरझामर क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और स्थानीय निवासियों ने तत्काल सागर कलेक्टर से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मुख्य मांग है कि एक संयुक्त जांच दल का गठन किया जाए, जिसमें देवरी बीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और सीएमएचओ शामिल हों। इस दल से अपेक्षा की जाती है कि वह इन कथित चिकित्सा केंद्रों के सभी प्रासंगिक दस्तावेजों, पंजीयन, डिग्री की प्रामाणिकता और मरीजों को दी जा रही दवाओं की गुणवत्ता की गहन जांच करे।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि जांच में बिना योग्यता के उपचार करने की पुष्टि होती है, तो ऐसे सभी अवैध चिकित्सा केंद्रों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में प्रशासन से कड़े कदम उठाने की अपेक्षा जताई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। नागरिकों का यह भी कहना है कि यह जांच केवल इन दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे क्षेत्र में ऐसे अन्य अवैध क्लीनिकों का भी पता लगाया जाना चाहिए जो बिना योग्यता के मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
प्रशासनिक निर्देशों का जमीनी असर अनिश्चित
यह उल्लेखनीय है कि सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की कई बैठकों में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों के खिलाफ निरंतर और सख्त कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए थे। वर्तमान परिदृश्य इस बात का संकेत देता है कि प्रशासनिक आदेशों का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने में कहीं न कहीं विफलता देखी जा रही है। जनमानस अब जिला प्रशासन की ओर से की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टकटकी लगाए हुए है। यह स्पष्ट होना अत्यंत आवश्यक है कि गोरझामर क्षेत्र में संचालित इन चिकित्सा केंद्रों को वास्तव में कोई वैधानिक अनुमति प्राप्त है अथवा यह केवल स्वास्थ्य मानकों के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है।
नागरिकों का कहना है कि मरीजों के जीवन की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बिना उचित योग्यता के किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा उपचार करने की अनुमति देना भारतीय कानून के तहत एक गंभीर अपराध है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच ही सच्चाई को उजागर कर सकती है और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहरा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। यह उम्मीद की जा रही है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद, मामले की तह तक जाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
