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गोण्डा में मूसलाधार बारिश से धान-गन्ना फसल बर्बाद, किसानों पर आर्थिक संकट

गोण्डा में तीन दिनों की मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं से धान व गन्ने की तैयार फसलें खेतों में गिरकर बर्बाद हो गई हैं, जिससे...

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•संवाददाता: बी पी त्रिपाठी
गोण्डा में मूसलाधार बारिश से धान-गन्ना फसल बर्बाद, किसानों पर आर्थिक संकट

गोण्डा | संवाददाता: बी पी त्रिपाठी

द क्लिफ न्यूज़ | गोण्डा | 1 अक्टूबर 2026

उत्तर प्रदेश के गोण्डा जनपद में पिछले सप्ताह तीन दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश और भीषण तूफानी हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे गंभीर असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है, जहाँ किसानों की धान और गन्ने की तैयार खड़ी फसलें खेतों में गिरकर पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।

लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के कारण मुख्य मार्गों सहित ग्रामीण सड़कों पर कई जगहों पर पेड़ गिर गए। इससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। प्रशासन को इन गिरे हुए पेड़ों को हटाकर सड़कों को सामान्य आवागमन के लिए बहाल करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

फसलों के नुकसान से किसानों की चिंता बढ़ी

इस बार की बारिश और आंधी ने विशेष रूप से कृषि पर निर्भर लोगों की कमर तोड़ दी है। झंझरी विकासखंड के केशोपुर पहाडवा गांव के किसान रमेश ने बताया कि उनकी चार बीघे धान की फसल अत्यंत अच्छी थी और उन्हें उम्मीद थी कि इससे प्राप्त आय से वे अपने पारिवारिक कार्यों को पूरा कर सकेंगे। परंतु, इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। रमेश ने कहा कि अब उनकी एकमात्र आशा जिला प्रशासन द्वारा घोषित की जाने वाली मुआवजे की राशि पर टिकी है।

केशोपुर पहाडवा गांव के अन्य किसान, जिनमें बलराम, बट्टू, रामू और मनोज शामिल हैं, ने भी अपनी कई बीघे धान और गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है। किसानों का कहना है कि फसल की इस बर्बादी ने उन्हें आर्थिक तंगी की कगार पर ला खड़ा किया है। कृषि पर आधारित इन परिवारों के लिए अब अपना जीवनयापन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

प्रशासन ने नुकसान के आकलन को दी प्राथमिकता

किसानों की व्यथा को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए फसल नुकसान का आकलन करना अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया है। प्रभावित किसान अब सरकार से आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उन्हें इस मुश्किल दौर से उबरने के लिए कुछ राहत मिल सके। वर्तमान में पूरा जनपद इस प्राकृतिक आपदा के कारण गहरे सदमे और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।