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गोंडा में अर्नब तूफान का कहर: धान-गन्ना फसलें बर्बाद, बिजली संकट

गोंडा में 'अर्नब तूफान' से मूसलाधार बारिश और हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त किया। हजारों बीघा धान-गन्ना फसलें बर्बाद, बिजली गुल होने से लाखों प्रभावित। प्रशासन राहत में जुटा।

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गोंडा में अर्नब तूफान का कहर: धान-गन्ना फसलें बर्बाद, बिजली संकट

द क्लिफ न्यूज़ | गोंडा | 27 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। 'अर्नब तूफान' के नाम से पहचाने जा रहे इस मौसमी संकट के चलते जिले के लगभग सभी विकासखंडों में मुख्य मार्गों सहित ग्रामीण सड़कों पर जगह-जगह पेड़ गिर गए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। गिरे हुए पेड़ों को हटाकर यातायात बहाल करने में भी प्रशासन को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार सुबह कुछ देर के लिए बारिश रुकने और हवाओं की रफ्तार कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन इस दौरान हुई भारी तबाही का मंजर अभी भी कायम है।

लगभग 65 से 70 घंटे तक जारी रहे इस खराब मौसम के कारण जिले भर में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। जनपद मुख्यालय सहित अन्य शहरी व ग्रामीण इलाकों में बिजली न होने से लाखों की आबादी प्रभावित है। मोबाइल नेटवर्क और अन्य आवश्यक सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है, जिससे लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे हैं। विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारी युद्धस्तर पर आपूर्ति बहाल करने में जुटे हैं और जल्द ही बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर ली जाएगी।

किसानों पर टूटा विपदा का पहाड़

तूफानी हवाओं और मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है। जिले में हजारों बीघा धान और गन्ने की फसलें खेतों में ही गिरकर बर्बाद हो गई हैं। खेतों में पानी भरने से फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। फसल को हुए इस भारी नुकसान का आकलन अब प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।

इस विनाशकारी प्राकृतिक प्रकोप ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तैयार खड़ी फसलें, जिनकी कटाई का समय नजदीक था, वह अब पानी में डूब चुकी हैं। धान की बालियां झुकी हुई हैं और गन्ने की फसलें भी खेतों में बिछ गई हैं। इस स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। कई किसानों ने इस फसल पर ही अपना पूरा साल टिकाया हुआ था, और अब उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।

प्रशासनिक स्तर पर, प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके। विभिन्न विकास खंडों से आई रिपोर्टों के अनुसार, कृषि भूमि पर जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के मौसम बने रहने की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस मुश्किल घड़ी में सरकार से मुआवजे और अन्य राहत उपायों की उम्मीद की जा रही है।