गोण्डा के विद्यालय में डांडिया आयोजन, लोक संस्कृति का प्रदर्शन
गोण्डा के कंपोजिट विद्यालय चेतपुर में डांडिया का भव्य आयोजन हुआ। खंड शिक्षा अधिकारी की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने लोक संस्कृति...

गोण्डा | संवाददाता: बी पी त्रिपाठी
द क्लिफ न्यूज़ | गोण्डा | 17 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के शिक्षा क्षेत्र वजीरगंज स्थित कंपोजिट विद्यालय चेतपुर में आज पारंपरिक डांडिया कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और विद्यालय परिसर में एक आनंदमय वातावरण का सृजन करना था। खंड शिक्षा अधिकारी श्रवण तिवारी की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय लोक संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान को जीवंत किया।
इस डांडिया आयोजन ने न केवल विद्यालय में उत्साह का संचार किया, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने और सामूहिक रूप से भाग लेने का एक अनूठा मंच भी प्रदान किया। कार्यक्रम की सफलता विद्यालय के सभी अध्यापकों और अध्यापिकाओं के समर्पण और आपसी सहयोग का परिणाम थी, जिसने छात्रों में सामूहिकता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा दिया।
सांस्कृतिक गतिविधियों से सर्वांगीण विकास
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कार्यक्रम न केवल उनकी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि सामाजिक सहभागिता को भी बढ़ाते हैं। शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ इन गतिविधियों का मेल बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहा है। विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे डांडिया नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया, जिससे विद्यालय परिसर में उत्साह और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। यह आयोजन बच्चों को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी विरासत पर गर्व करने का एक सशक्त माध्यम बना।
खंड शिक्षा अधिकारी की प्रेरणा से रचनात्मक वातावरण
खंड शिक्षा अधिकारी श्रवण तिवारी के सक्रिय सहयोग और प्रेरणा से कंपोजिट विद्यालय चेतपुर में निरंतर रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन हेतु एक अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उनकी दूरदर्शिता और शैक्षिक नवाचारों के प्रति प्रतिबद्धता ने विद्यालय को ऐसे आयोजनों के लिए प्रोत्साहित किया है, जो विद्यार्थियों के बौद्धिक और भावनात्मक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। तिवारी का मानना है कि पारंपरिक कलाओं और लोक उत्सवों को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना आवश्यक है ताकि अगली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रख सके।
भविष्य में निरंतरता का संकल्प
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में रश्मि श्रीवास्तव, प्रेमलता सिंह, अभय सिंह और प्रदीप सिंह के संयोजक मंडल का योगदान सराहनीय रहा। विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन एक यादगार अनुभव बना। संयोजक मंडल के सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों को जारी रखने का संकल्प लिया है, ताकि विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर अवसर मिलते रहें। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यालय के शैक्षणिक माहौल को अधिक सकारात्मक और जीवंत बनाते हैं, जिससे विद्यार्थियों की सीखने की ललक बढ़ती है और वे विद्यालय को एक आनंददायक स्थान मानते हैं।
