गौशाला में चारा-पानी की कमी, पशु क्रूरता की शिकायत पर जांच की मांग
नरसिंहपुर के करेली ब्लॉक की रातीकरार कला स्थित गौशाला में चारा-पानी की कमी और अव्यवस्थाओं की शिकायत पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई...

संवाददाता: भागीरथ तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहपुर | 28 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के करेली जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत रातीकरार कला में संचालित मुख्यमंत्री गौवंश सहायता योजना के तहत बनी गौशाला में अव्यवस्थाओं और गौवंश को पर्याप्त चारा-पानी न मिलने की शिकायत सामने आई है। भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड से नियुक्त मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि भागीरथ तिवारी ने गौशाला के निरीक्षण के बाद वहां की बदहाल स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने गौवंश के लिए समुचित चारे, स्वच्छ पेयजल और उचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।
भागीरथ तिवारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि गौशाला में गोवंश भूखा-प्यासा था। चारे की व्यवस्था अपर्याप्त थी, और पीने के पानी की टंकी में भी स्वच्छता का अभाव था। इस स्थिति को उन्होंने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत गंभीर अनियमितता बताया है।
गौशाला संचालन पर उठे सवाल
तिवारी ने बताया कि जब उन्होंने ग्राम पंचायत के जिम्मेदार लोगों से गौशाला के संचालन के बारे में पूछताछ की, तो उन्हें पता चला कि इसका संचालन एक स्व-सहायता समूह को सौंपा गया है। स्थानीय सरपंच पक्ष के अनुसार, यह व्यवस्था भाजपा मंडल अध्यक्ष संजय बनवारी के निर्देश पर की गई है। इस आरोप के बाद गौशाला के संचालन की प्रक्रिया, आवंटित जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
गौवंश के साथ कथित दुर्व्यवहार और अव्यवस्थाओं को लेकर भागीरथ तिवारी ने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक आवेदन भेजा है। इस आवेदन में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। शिकायत की प्रतियां भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी, जिला कलेक्टर, मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे तत्काल मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाएं। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पशु क्रूरता सिद्ध होती है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही गौवंश की देखभाल और प्रबंधन की हकीकत सामने आ सकेगी।
