गणेश चतुर्थी: नरसिंहगढ़ के बाजार भक्तिमय, मिट्टी की मूर्तियों की बढ़ी मांग
नरसिंहगढ़ में गणेश चतुर्थी का उत्साह, बाजारों में सजीं गणेश प्रतिमाएं। पर्यावरण संरक्षण के चलते मिट्टी की मूर्तियों को मिल रही प्राथमिकता, पीओपी की मूर्तियां...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 14 सितंबर 2026
गणेश उत्सव के आगमन से ठीक पहले नरसिंहगढ़ का मुख्य बाजार पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमाएं विभिन्न स्थानों पर सजी हुई हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। भक्त 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों के साथ अपने आराध्य की प्रतिमाएं खरीदकर उन्हें श्रद्धापूर्वक अपने घरों में ले जा रहे हैं। कलाकारों द्वारा निर्मित विभिन्न आकारों की प्रतिमाओं ने बाजार की शोभा बढ़ाई है, जिससे एक उत्सवपूर्ण माहौल निर्मित हुआ है।
बाजारों में उत्सव का उल्लास इस कदर छा गया है कि श्रद्धालु अपने घरों में गणपति स्थापना के लिए विशेष स्थान तैयार कर चुके हैं और सजावट की तैयारियों में जुट गए हैं। भक्त सुख, समृद्धि और शांति की कामना के साथ भगवान गणेश को अपने घरों में विराजमान करने के लिए उत्सुक हैं। पूरे क्षेत्र में उत्सव को लेकर विशेष हर्ष और उल्लास का वातावरण व्याप्त है।
पर्यावरण के प्रति सजगता और मूर्तियों की कीमत
इस वर्ष मूर्तियों की कीमतों में पिछली बार की तुलना में कुछ बढ़ोतरी देखी गई है। श्रद्धालुओं के अनुसार, यह मामूली वृद्धि उत्साह को कम नहीं कर सकी है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण, लोग मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। ये प्रतिमाएं न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश भी देती हैं। हालांकि, बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियां भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जो अपनी बारीक कारीगरी के लिए जानी जाती हैं।
बारिश के बावजूद उत्साह चरम पर
स्थानीय मौसम में बारिश की फुहारों के बावजूद, मूर्तियों की खरीददारी के लिए आने वाले खरीदारों की भीड़ कम नहीं हुई है। यह गणेश उत्सव के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और उत्साह को दर्शाता है। लोग बेसब्री से अपने प्रिय भगवान को घर लाने और विधि-विधान से स्थापित करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह पर्व क्षेत्र में एकता और उल्लास का प्रतीक बना हुआ है।
