गांधीसागर अभयारण्य में मादा चीता 'राधा' को छोड़ा, चीतों की संख्या हुई चार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में कूनो से लाई गई मादा चीता को छोड़ा, जिसका नाम 'राधा' रखा गया। इससे अभयारण्य में...

मंदसौर जिला गरोठ तहसील | संवाददाता: राजकुमार कोटवार
द क्लिफ न्यूज़ | मंदसौर | 22 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को एक नया आयाम मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को अभयारण्य के सॉफ्ट रिलीज बाड़े में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से स्थानांतरित की गई एक मादा चीता को छोड़ा। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने नव-आगंतुक मादा चीता का नामकरण 'राधा' किया। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ, गांधीसागर अब देश में चीतों के लिए दूसरा प्रमुख निवास स्थान बन गया है, जहाँ चीतों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है।
अप्रैल 2025 में नर चीते प्रभास और पावक को गांधीसागर में लाया गया था, जिसके बाद से यहाँ चीतों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने का कार्य निरंतर जारी है। मादा चीता 'राधा' के आगमन से इस परियोजना को और मजबूती मिली है। इस अभयारण्य में अब दो नर और दो मादा चीते विचरण कर रहे हैं, जो चीता संरक्षण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
चीतों के लिए विकसित हुआ विस्तृत प्राकृतिक आवास
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों के पुनर्वास के लिए लगभग 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को संरक्षित आवास के रूप में विकसित किया गया है। इस क्षेत्र में सॉफ्ट रिलीज बाड़े, अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियाँ और चीतों के प्रबंधन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं स्थापित की गई हैं। वन विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों और वन्यजीव गाइडों को भी चीतों के सुरक्षित प्रबंधन और संरक्षण के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, ताकि वे चीतों की देखरेख प्रभावी ढंग से कर सकें।
वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
गांधीसागर में चीतों की उपस्थिति क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रबल संभावनाएँ जगाती है। चीतों के आकर्षण के कारण पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होमस्टे, गाइड सेवाओं और परिवहन जैसे क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं खुलेंगी, जो मंदसौर और नीमच जिलों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह परियोजना क्षेत्र के लिए एक प्रमुख विकास का कारक सिद्ध हो सकती है।
प्रोजेक्ट चीता के तहत संख्या वृद्धि पर जोर
भारत में प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के साथ ही, देश में चीतों की आबादी बढ़ाने और उनके लिए नए उपयुक्त आवासों के विकास पर निरंतर जोर दिया जा रहा है। 18 सितंबर 2026 तक, पूरे भारत में चीतों की कुल संख्या 56 दर्ज की गई थी। वैज्ञानिक निगरानी और प्रबंधन के माध्यम से, गांधीसागर को भविष्य में भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में से एक के रूप में स्थापित करने के प्रयास जारी रहेंगे, जिससे देश की जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
