गंदे किचन की वायरल तस्वीरों ने बढ़ाया खाद्य सुरक्षा पर जोर, 24 हजार से अधिक छापे
सोशल मीडिया पर रेस्तरां की अस्वच्छता की तस्वीरें वायरल होने के बाद खाद्य नियामकों ने अप्रैल 2026 से देशभर में 24 हजार से अधिक छापे मारे हैं। महाराष्ट्र इस अभियान का प्रमुख केंद्र रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 सितंबर 2026
सोशल मीडिया पर रेस्तरां और वाणिज्यिक रसोईघरों की कथित तौर पर अस्वच्छ तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। उपभोक्ताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की बढ़ती शिकायतों के दबाव के बीच, खाद्य नियामकों ने अपनी जांच और कार्रवाई में तेजी ला दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 से अब तक देशभर में खाद्य कारोबारियों के खिलाफ 24,000 से अधिक छापे मारे गए हैं। यह संख्या मार्च 2023 को समाप्त हुए पूरे वित्तीय वर्ष में की गई कुल जांचों का लगभग दो-तिहाई है।
इन हालिया जांचों में कई स्थानों पर मक्खियों, चूहों और कॉकरोच जैसे कीटों का संक्रमण, एक्सपायर्ड या मिलावटी कच्चे खाद्य पदार्थ, और भोजन के अनुचित भंडारण जैसी गंभीर खामियां पाई गई हैं। कई मामलों में, कार्रवाई सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो या पोस्ट के बाद शुरू हुई, जब उपभोक्ताओं ने सरकारी शिकायत पोर्टलों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
सोशल मीडिया बना निगरानी का नया तंत्र
सोशल मीडिया ने खाद्य सुरक्षा की निगरानी के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। जहां पहले किसी रेस्तरां की खराब स्वच्छता से जुड़ी शिकायतें एक सीमित दायरे तक ही सीमित रह जाती थीं, वहीं अब एक वीडियो या तस्वीर कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। इसके परिणामस्वरूप, संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग जोर पकड़ लेती है, और नियामक एजेंसियां भी जांच शुरू करने के लिए बाध्य हो जाती हैं।
उपभोक्ता अब अनौपचारिक निगरानी तंत्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो रेस्तरां की रसोई में गंदगी, खाद्य सामग्री के गलत भंडारण, या कीटों की मौजूदगी की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं। वे संबंधित विभागों को टैग कर कार्रवाई की मांग करते हैं।
महाराष्ट्र से शुरू हुई सख्ती, देशव्यापी हुई लागू
खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर महाराष्ट्र इस राष्ट्रव्यापी अभियान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मई 2026 से अब तक 3,000 से अधिक स्थानों का निरीक्षण किया है। इन कार्रवाइयों में बड़े क्लबों से लेकर फास्ट-फूड श्रृंखलाएं तक शामिल रही हैं। महाराष्ट्र के बाद, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच तेज कर दी गई है।
इस अभियान के पीछे महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे का सख्त रवैया चर्चा का विषय रहा है। उनके नेतृत्व में, विभाग ने खाद्य स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के लिए कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हालांकि, रेस्तरां उद्योग के एक वर्ग ने कार्रवाई के तरीकों और लगाए गए दंड को अत्यधिक कठोर बताते हुए आपत्ति भी जताई है।
बड़े होटल और क्विक-कॉमर्स कंपनियां भी दायरे में
खाद्य सुरक्षा अभियान अब केवल छोटे रेस्तरां और ढाबों तक ही सीमित नहीं है। इस वर्ष की जांचों में दिल्ली के JW Marriott जैसे पांच सितारा होटल और मुंबई के Cricket Club of India जैसे प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान भी जांच के दायरे में आए हैं। JW Marriott की स्थानीय इकाई ने अधिकारियों के साथ सहयोग करने और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है।
तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स क्षेत्र पर भी नियामकों की पैनी नजर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और महाराष्ट्र FDA ने अलग-अलग कार्रवाइयों में Blinkit और Swiggy Instamart से जुड़े कुछ वेयरहाउसों में कथित स्वच्छता संबंधी खामियों की जांच की है। इसके अतिरिक्त, पैकेज्ड फूड कंपनियों की लेबलिंग और उपभोक्ताओं को प्रदान की जाने वाली जानकारी भी जांच के दायरे में है।
त्योहारी सीजन से पहले निगरानी बढ़ी
सितंबर से देश में त्योहारी खरीदारी और बाहर खाने-पीने का दौर शुरू हो जाता है, और दिवाली तक मिठाई, रेस्तरां, पैकेज्ड फूड और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग में वृद्धि होती है। ऐसे में, खाद्य नियामकों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर में, कुछ बैच के घी की बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगा दी गई है, जबकि गुजरात की राजधानी में 11,000 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों को अपने किचन में कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया है। कर्नाटक में भी, असुरक्षित पाए गए खाद्य उत्पादों को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई जारी है।
स्थायी सुधार पर जोर
देशभर में बढ़ी हुई कार्रवाई से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। हालांकि, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा केवल वायरल वीडियो के सामने आने के बाद की जाने वाली कार्रवाई तक ही सीमित न रहे। नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता, सुरक्षित भंडारण प्रथाएं, स्वच्छ रसोई और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निरंतर निगरानी ही इस अभियान को स्थायी परिणाम दे सकती है।
24,000 से अधिक छापों ने यह संकेत जरूर दिया है कि खाद्य सुरक्षा अब केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर उपभोक्ता द्वारा साझा की गई एक तस्वीर या वीडियो भी नियामक कार्रवाई की शुरुआत बन सकती है।
