पति को ‘आतंकवादी’ बताकर FIR दर्ज कराई: भोपाल फैमिली कोर्ट में सामने आया अनोखा और गंभीर आरोपों वाला वैवाहिक विवाद
भोपाल जिला फैमिली कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अनुभवी काउंसलर्स तक को हैरान कर दिया। वैवाहिक विवाद के दौरान एक...

भोपाल जिला फैमिली कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अनुभवी काउंसलर्स तक को हैरान कर दिया। वैवाहिक विवाद के दौरान एक महिला ने अपने पति को “आतंकवादी” बताते हुए पुलिस में FIR दर्ज करा दी—और यह दावा किया कि पति “ग़लत संगत में है और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।”
यह पहला अवसर है जब वैवाहिक तनाव ने इस स्तर तक जाकर इतना असामान्य मोड़ लिया है।
2013 में हुई शादी, छोटे-छोटे झगड़ों से बढ़कर गंभीर आरोपों तक पहुंचा विवाद
दंपति मध्य-तीस के उम्र वर्ग का है और दोनों पढ़े-लिखे हैं। पति एक निजी कंपनी में कार्यरत है और पत्नी गृहिणी है। वर्ष 2013 में शादी के बाद दोनों की एक आठ वर्षीय बेटी है।
शुरुआत में मतभेद दैनिक जीवन की सामान्य बातों को लेकर थे—पति द्वारा पर्याप्त ध्यान न देने, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने और महिला द्वारा पति पर विवाहेत्तर संबंध के आरोप लगाए जाने जैसी बातें विवाद का केंद्र रहीं।
करीब दो साल पहले स्थिति बिगड़ने पर महिला बेटी के साथ अपने मायके चली गई, जबकि पति अपने माता-पिता के साथ रहने लगा।
समझौते की कोशिशें नाकाम, महिला ने धारा 125 CrPC में भरण-पोषण का दावा किया
दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास असफल रहे। इसके बाद महिला ने जिला फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की मांग करते हुए धारा 125 CrPC के तहत आवेदन दायर किया।
इसी दौरान, कार्यवाही चलते-चलते, महिला ने पुलिस के पास जाकर दावा किया कि उसका पति “आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है”—एक ऐसा आरोप जिसने मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ा दी।
काउंसलिंग में सामने आया सच: ‘अनुचित आरोप जीवन बिगाड़ सकते हैं’
जब मामला काउंसलिंग के लिए पहुंचा, तो काउंसलर ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि वे पहले आपस में बातचीत करने की कोशिश करें और यदि समझौता मुमकिन न हो, तो आपसी सहमति से तलाक का रास्ता चुन सकते हैं, जिसमें पति एकमुश्त गुजारा भत्ता प्रदान करेगा।
काउंसलर ने महिला को कड़ी चेतावनी दी कि बिना आधार के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना न केवल पति का करियर और सामाजिक जीवन प्रभावित कर सकता है, बल्कि पूरे परिवार को भी गहरी कानूनी मुश्किलों में डाल सकता है।
काउंसलर शैल अवस्थी ने कहा,
“वैवाहिक विवादों में बढ़ा-चढ़ाकर या गलत आरोप लगाना आम बात है, लेकिन किसी को आतंकवादी कहना अत्यंत गंभीर और दुर्लभ है। यह मामला वाकई सबसे अलग है।” (यह बयान मूल उद्धरण का पराफ्रेज़ किया गया है।)
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
परिवार कानून से जुड़े वकीलों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता में आतंकवाद जैसा आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है। झूठा मामला बनाए जाने पर न केवल शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, बल्कि आरोपित व्यक्ति को भी लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस आमतौर पर प्रारंभिक जांच में तथ्यों की पुष्टि करती है और बिना आधार के आरोप सिद्ध होते ही मामला खारिज कर दिया जाता है।
मामले का सामाजिक संदेश: वैवाहिक तनाव में अतिशयोक्ति खतरनाक
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आधुनिक वैवाहिक संबंधों में अविश्वास और संवादहीनता के खतरनाक स्तर को दर्शाती है।
फैमिली कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,
“झूठे या अतिरंजित आरोप केवल कानूनी मामलों को जटिल बनाते हैं। सबसे अधिक नुकसान बच्ची जैसी निर्भर सदस्यों को होता है।”
