एयरलाइंस के फैसले से 25 हजार उड़ानें घटेंगी, किराए पर दबाव बढ़ने की आशंका
जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में आठ प्रमुख एयरलाइनों ने 8.5% कम उड़ानें निर्धारित की हैं। घरेलू किराए में 20% वृद्धि और यात्री यातायात में 4.8% गिरावट के बीच मंत्रालय ने शुल्क में 25% कटौती की है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026
भारतीय विमानन क्षेत्र एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहाँ मांग और परिचालन लागत के दबाव के चलते एयरलाइनों ने आगामी जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए अपनी उड़ानों की संख्या में उल्लेखनीय कमी की है। आठ प्रमुख एयरलाइनों ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 25,000 उड़ानें कम निर्धारित की हैं। इस अवधि में कुल उड़ानों की संख्या घटकर 2,73,549 रह गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 2,98,939 था, जो 8.5% की गिरावट दर्शाता है।
सितंबर माह में इंडिगो एयरलाइन द्वारा उड़ानों में सबसे बड़ी कटौती देखी गई है। इस कमी के पीछे घरेलू हवाई किराए में 20% से अधिक की वृद्धि और यात्री यातायात में लगभग 4.8% की गिरावट जैसे कारक प्रमुख हैं। इन परिस्थितियों ने विमानन कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
यात्री किराए पर पड़ेगा असर
उड़ानों की क्षमता में आई इस कमी का सीधा असर व्यस्ततम मार्गों पर सीटों की उपलब्धता पर पड़ सकता है। यदि मांग वर्तमान स्तर पर बनी रहती है, तो सीटों की कमी के कारण हवाई किराए में और भी वृद्धि होने की प्रबल आशंका है। यात्रियों को इस परिदृश्य में यात्रा योजनाओं पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
सरकारी राहत और भविष्य की राह
विमानन क्षेत्र को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से, नागर विमानन मंत्रालय ने घरेलू उड़ानों के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% की कटौती की है। यह व्यवस्था तीन महीने की अवधि के लिए लागू की गई है, जिसका उद्देश्य एयरलाइनों की परिचालन लागत को कम करने में सहायता करना है। अब सभी की निगाहें अक्टूबर माह के बाद की स्थिति पर टिकी हैं, जहाँ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या एयरलाइंस उड़ानों की संख्या बढ़ाती हैं या मौजूदा कटौती का सिलसिला जारी रहता है। यह निर्णय न केवल एयरलाइनों के भविष्य के परिचालन पर, बल्कि हवाई यात्रा की सामर्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।
