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एथलेटिक प्यूबैल्जिया: खेल हर्निया नहीं, बल्कि मांसपेशियों के खिंचाव से होने वाला ग्रोइन दर्द

खिलाड़ियों में आम 'स्पोर्ट्स हर्निया' असल में ग्रोइन और पेट के निचले हिस्से में मांसपेशियों के खिंचाव या चोट से जुड़ा एथलेटिक प्यूबैल्जिया है, जो दौड़ने, दिशा बदलने और किकिंग से बढ़ सकता है।

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एथलेटिक प्यूबैल्जिया: खेल हर्निया नहीं, बल्कि मांसपेशियों के खिंचाव से होने वाला ग्रोइन दर्द

द क्लिफ न्यूज़ | 23 अगस्त 2026

एथलेटिक प्यूबैल्जिया, जिसे आमतौर पर 'स्पोर्ट्स हर्निया' कहा जाता है, खिलाड़ियों और सक्रिय व्यक्तियों में ग्रोइन और पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द का एक प्रमुख कारण है। यह स्थिति वास्तविक इनग्विनल हर्निया से भिन्न है और इसमें मुख्य रूप से पेट की रेक्टस एब्डोमिनिस तथा जांघ की एडक्टर मांसपेशियों से जुड़े ऊतकों में खिंचाव या चोट शामिल होती है। यह समस्या विशेष रूप से उन खेलों में अधिक पाई जाती है जिनमें तेज दौड़ना, दिशा में अचानक बदलाव, किक मारना और शरीर को तेजी से मोड़ना जैसी क्रियाएं शामिल होती हैं।

एथलेटिक प्यूबैल्जिया से उत्पन्न दर्द प्रायः धीरे-धीरे शुरू होता है और ग्रोइन या पेट के निचले हिस्से में गहरा महसूस हो सकता है। प्रारंभिक अवस्था में, यह दर्द केवल शारीरिक गतिविधि के दौरान अनुभव किया जा सकता है, लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, यह दैनिक गतिविधियों को भी प्रभावित करने लगता है। स्प्रिंटिंग, किकिंग, कटिंग और ट्विस्टिंग जैसी हरकतों से दर्द का बढ़ना इस समस्या का एक स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा, सिट-अप करते समय या पेट की मांसपेशियों को किसी प्रतिरोध के विरुद्ध सिकोड़ने पर भी दर्द उत्पन्न हो सकता है। इसी प्रकार, पैर को शरीर की ओर खींचने वाली एडक्टर मांसपेशियों के प्रतिरोधी संकुचन के दौरान दर्द का अनुभव होना भी एक महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सामान्य इनग्विनल हर्निया के विपरीत, एथलेटिक प्यूबैल्जिया में आमतौर पर कोई स्पष्ट बाहरी उभार दिखाई नहीं देता है। आराम करने पर दर्द कम हो सकता है, परंतु खेल गतिविधि पुनः शुरू करने पर यह फिर से उभर आता है।

प्रभावित शारीरिक संरचनाएं

एथलेटिक प्यूबैल्जिया की स्थिति में शरीर की कई महत्वपूर्ण संरचनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इनमें रेक्टस एब्डोमिनिस मांसपेशी का इंसर्शन (जहां मांसपेशी हड्डी से जुड़ती है), कंजॉइंट टेंडन, एक्सटर्नल ऑब्लिक एपोन्यूरोसिस (पेट की बाहरी तिरछी मांसपेशियों का आवरण), एडक्टर लॉन्गस मांसपेशी का ओरिजिन (जहां से मांसपेशी शुरू होती है), प्यूबिक सिम्फिसिस (जांघ की हड्डियों के बीच का जोड़) और पोस्टेरियर इनग्विनल वॉल (पेट की पिछली इनग्विनल दीवार) शामिल हैं। खेल के दौरान इन संरचनाओं पर बार-बार पड़ने वाला खिंचाव या तनाव ही दर्द और चोट का मुख्य कारण बनता है।

फेमोरोएसिटाबुलर इम्पिंजमेंट (FAI) से भिन्नता

ग्रोइन दर्द का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण फेमोरोएसिटाबुलर इम्पिंजमेंट (FAI) हो सकता है। हालांकि दोनों ही स्थितियां एथलीटों में ग्रोइन दर्द पैदा कर सकती हैं, उनमें कुछ प्रमुख अंतर हैं। एथलेटिक प्यूबैल्जिया में दर्द मुख्य रूप से ग्रोइन और पेट के निचले हिस्से में केंद्रित होता है, जबकि FAI में दर्द कूल्हे के गहरे एंटीरियर (सामने) हिस्से में अधिक महसूस होता है। खेल की विशिष्ट गतिविधियों की बात करें तो, एथलेटिक प्यूबैल्जिया में स्प्रिंटिंग, किकिंग और दिशा बदलने जैसी क्रियाओं से दर्द बढ़ता है। इसके विपरीत, FAI में हिप का फ्लेक्सियन (जांघ को ऊपर उठाना), स्क्वाटिंग (नीचे बैठना) और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी गतिविधियां अधिक परेशानी पैदा कर सकती हैं।

नैदानिक ​​दृष्टिकोण से, रेजिस्टेड एडक्शन (जांघ की अंदरूनी मांसपेशियों को प्रतिरोध के विरुद्ध सिकोड़ना) और रेजिस्टेड सिट-अप एथलेटिक प्यूबैल्जिया में अक्सर दर्दनाक होते हैं। वहीं, FAI में ये लक्षण उतने विशिष्ट नहीं होते। इसके विपरीत, FADIR परीक्षण (कूल्हे के जोड़ के एक विशिष्ट मूवमेंट का परीक्षण) FAI में अक्सर सकारात्मक पाया जाता है, जबकि एथलेटिक प्यूबैल्जिया में यह परीक्षण आमतौर पर नकारात्मक रहता है। इन स्थितियों के निदान के लिए, एथलेटिक प्यूबैल्जिया के मूल्यांकन में पेल्विस (श्रोणि) का एमआरआई (MRI) उपयोगी हो सकता है। वहीं, FAI के मूल्यांकन के लिए आवश्यकतानुसार कूल्हे का एक्स-रे, एमआरआई या सीटी स्कैन (CT Scan) किया जा सकता है।

सह-अस्तित्व और समग्र मूल्यांकन का महत्व

यह समझना महत्वपूर्ण है कि एथलेटिक प्यूबैल्जिया और FAI हमेशा एक-दूसरे से स्वतंत्र नहीं होतीं। कई खिलाड़ियों में ये दोनों स्थितियां एक साथ मौजूद हो सकती हैं, जिससे निदान और उपचार अधिक जटिल हो जाता है। इसलिए, जिन खिलाड़ियों को लगातार या बार-बार ग्रोइन दर्द की समस्या होती है, उनका मूल्यांकन करते समय केवल हर्निया या केवल कूल्हे के जोड़ पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है।

एक व्यापक शारीरिक मूल्यांकन आवश्यक है, जिसमें कूल्हे की गति की सीमा, एडक्टर और पेट की मांसपेशियों की ताकत का आकलन, प्यूबिक क्षेत्र की संवेदनशीलता और इनग्विनल संरचनाओं की समग्र जांच शामिल हो। सही कारण की सटीक पहचान होने पर ही प्रभावी उपचार योजना बनाई जा सकती है और खिलाड़ी को सुरक्षित तथा समय पर खेल में वापसी के लिए तैयार किया जा सकता है। यह समग्र दृष्टिकोण एथलीटों को उनकी समस्या का स्थायी समाधान खोजने और भविष्य में चोटों को रोकने में मदद करता है।