एशियाई खेल 2026: हॉकी स्वर्ण के साथ भारत का अभियान समाप्त, कुल 85 पदक
आइची-नागोया में एशियाई खेल 2026 का समापन हो गया है। भारत ने पुरुष हॉकी में मलेशिया को हराकर 21वां स्वर्ण पदक जीता, जिससे कुल पदकों की संख्या 85 तक पहुँच गई।

द क्लिफ न्यूज़ | आइची-नागोया | 3 अक्टूबर 2026
आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेल 2026 का 15वां और अंतिम दिन भारत के लिए शानदार रहा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह भारत का इस खेल आयोजन में 21वां स्वर्ण पदक था, जिससे उसके कुल पदकों की संख्या 85 तक पहुँच गई। इस प्रदर्शन के साथ, भारत ने एक बार फिर इस चार-वर्षीय मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में शीर्ष 5 देशों में अपनी जगह सुरक्षित की है।
पिछले हांगझोऊ संस्करण की तुलना में, भारत के कुल पदकों की संख्या में 21 की कमी आई है, वहीं स्वर्ण पदकों में सात की गिरावट देखी गई। 2022 में भारत ने हांगझोऊ में 106 पदक जीते थे, जो पहली बार 100 का आंकड़ा पार करने का एक ऐतिहासिक पल था। आइची-नागोया में भारत का सफ़र मिश्रित रहा, जहाँ कुछ प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप रहे तो कुछ निराशाजनक भी। हालाँकि, अंतिम दिनों में शानदार प्रदर्शन ने इस अभियान की समग्र तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया।
ऐतिहासिक प्रदर्शन और व्यक्तिगत उपलब्धियां
इस एशियाई खेल में कई ऐतिहासिक जीतें भी दर्ज की गईं। कुमकुम मोहोद ने तीरंदाजी में और प्रणवी उर्स ने गोल्फ में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीते। पहलवान अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किग्रा वर्ग में विश्व चैंपियन को हराकर स्वर्ण पदक जीतकर सबको चौंका दिया।
पुरुष हॉकी टीम ने अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने के अलावा, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने भी अपना दबदबा कायम रखते हुए स्वर्ण पदक जीता। वहीं, भारतीय महिला गोल्फ टीम ने एक ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। कुश्ती में, अंतिम पंघाल ने महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि दीपक पूनिया ने पुरुषों के 97 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया, जिसने 60 साल के सूखे को समाप्त किया।
पदक तालिका में भारत का स्थान
कुल मिलाकर, भारत ने एशियाई खेल 2026 में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित 85 पदक जीते। इस प्रदर्शन के साथ, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। हालाँकि 2022 के संस्करण की तुलना में पदकों की संख्या कम रही, लेकिन कई नए रिकॉर्ड बने और टूटे। यह भारत के लिए एक यादगार अभियान रहा, जिसने देश के खेल परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
