एससीओ शिखर सम्मेलन: मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से बढ़ी कूटनीतिक हलचल
बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने ध्यान खींचा। यह मुलाकात गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन तनाव के बीच हुई।

द क्लिफ न्यूज़ | बिश्केक | 1 सितंबर 2026
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दोनों नेताओं का गर्मजोशी से अभिवादन और छोटी सी बातचीत, जो एक फ्रेम में कैद हुई, भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति को लेकर उत्सुकता पैदा करती है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से सीमा विवाद को लेकर गंभीर तनाव बना हुआ है।
एससीओ शिखर सम्मेलन, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, संपर्क, तकनीक और बहुपक्षीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है, इस वर्ष विशेष रूप से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच साबित हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर का उपयोग रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जैसे प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के लिए किया।
एससीओ में कूटनीति का संगम: मोदी, जिनपिंग, पुतिन एक साथ
एससीओ की आधिकारिक समूह फोटो के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक साथ एक ही फ्रेम में नजर आना, इस बहुपक्षीय संगठन की कूटनीतिक महत्ता को दर्शाता है। फोटो खिंचवाने से पहले, प्रधानमंत्री मोदी को शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ संक्षिप्त बातचीत करते हुए देखा गया। यह दृश्य, विशेष रूप से भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में, पर्यवेक्षकों के लिए विश्लेषण का विषय बना।
वहीं, भारत-पाकिस्तान संबंधों की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी और शहबाज शरीफ के बीच इस दौरान किसी प्रमुख प्रत्यक्ष बातचीत या हाथ मिलाने का दृश्य सामने नहीं आया। इससे सम्मेलन में मौजूद राजनीतिक और मीडिया हलकों में दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर चर्चा तेज हुई।
गलवान के बाद संवाद की ओर एक कदम?
वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर गिरावट आई थी। सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर लंबे समय तक तनाव का माहौल बना रहा। ऐसे में, बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की यह सार्वजनिक मुलाकात, भले ही संक्षिप्त हो, संवाद की कड़ी को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस मात्र मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में बड़े बदलाव या सामान्यीकरण का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। यह केवल कूटनीतिक संवाद को जीवित रखने का एक प्रयास हो सकता है।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख
इस वर्ष के एससीओ शिखर सम्मेलन में, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत प्रतिबद्धता और क्षेत्रीय शांति की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। इसके अतिरिक्त, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में भारत लगातार कूटनीति और बातचीत को ही समाधान का एकमात्र रास्ता बताता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ हुई बातचीत को इसी व्यापक वैश्विक कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। इन मुलाकातों के माध्यम से भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का प्रदर्शन किया है।
भारत के लिए रणनीतिक अवसर
बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक बहुपक्षीय बैठक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण रहा है। इसने चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान जैसे प्रभावशाली देशों के साथ एक ही मंच पर जुड़ने और अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न नेताओं के साथ लगातार द्विपक्षीय बैठकें भारत की सक्रिय और मुखर कूटनीति को रेखांकित करती हैं। यह सम्मेलन भारत के लिए अपने पड़ोसियों और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों को प्रबंधित करने तथा क्षेत्रीय तथा वैश्विक एजेंडे में अपनी भूमिका को मजबूत करने का एक मंच बना है।
