EOW की बालाघाट PWD अधिकारी पर कार्रवाई, 11 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा
बालाघाट में पदस्थ PWD के प्रभारी कार्यपालन यंत्री कमल किशोर सिंगारे के खिलाफ EOW ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की है। बालाघाट, छिंदवाड़ा और भोपाल स्थित तीन ठिकानों पर हुई छापेमारी में करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 4 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के बालाघाट में लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रभारी कार्यपालन यंत्री कमल किशोर सिंगारे के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। EOW की विभिन्न टीमों ने अधिकारी से जुड़े बालाघाट, छिंदवाड़ा और भोपाल स्थित तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में अधिकारी की घोषित आय से करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा होने की बात कही गई है।
यह कार्रवाई ठेकेदारों से कथित तौर पर कमीशनखोरी और निर्माण कार्यों के बिल पास कराने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायतों के बाद की गई है। मध्य प्रदेश सिविल कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की शिकायत पर EOW ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान अधिकारी की घोषित आय और उनकी संपत्तियों के बीच बड़े अंतर की जानकारी सामने आने के बाद यह छापेमारी अभियान चलाया गया।
ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई, दस्तावेज जब्त
EOW की टीमों ने बालाघाट स्थित अधिकारी के सरकारी आवास के साथ-साथ भोपाल और छिंदवाड़ा में स्थित उनके अन्य आवासों पर भी एक साथ छापा मारा। छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, नकदी, आभूषण और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। कार्रवाई के दौरान मिले सभी जब्त दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि संपत्ति की वास्तविक कीमत और उसके स्रोत का पता लगाया जा सके।
संपत्तियों के मूल्य और आय के स्रोत की जांच जारी
प्रारंभिक जांच में भोपाल और छिंदवाड़ा में करोड़ों रुपये मूल्य के मकान और जमीन से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, एक आलीशान फार्म हाउस और लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का भी पता चला है। EOW की टीमें अब इस बात की पड़ताल में जुटी हैं कि इन महंगी संपत्तियों की खरीद के लिए धन का स्रोत क्या था और इनमें से कितनी संपत्तियां अधिकारी या उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर पंजीकृत हैं।
छापेमारी के दौरान 350 ग्राम से अधिक सोना-चांदी के आभूषण और बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद हुई है। इसके अतिरिक्त, अधिकारी और उनके परिवार के नाम पर विभिन्न बैंकों में कुल 12 बैंक खाते भी मिले हैं। इन खातों में जमा राशि, उनके लेन-देन के पैटर्न और निवेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि संपत्तियों और बैंक खातों में जमा राशि अधिकारी की ज्ञात आय के अनुरूप है या नहीं।
33 साल की सेवा के बाद आय और संपत्ति में बड़ा अंतर
EOW की प्रारंभिक जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू अधिकारी की लगभग 33 वर्षों की सेवा अवधि और उनकी पाई गई संपत्ति के बीच का कथित भारी अंतर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सेवाकाल के दौरान उनका कुल वेतन लगभग 1.5 करोड़ रुपये रहा है। इसके विपरीत, अब तक की जांच में 11 करोड़ रुपये से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है, जो उनकी घोषित आय से कहीं अधिक है।
हालांकि, संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य और इन संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए आय के स्रोत का अंतिम निर्धारण विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। EOW वर्तमान में दस्तावेजों, बैंक खातों और जब्त की गई संपत्तियों के रिकॉर्ड का गहन मिलान कर रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। EOW की कार्रवाई अभी जारी है और जब्त किए गए दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या अधिकारी ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों के अलावा किसी अन्य अवैध माध्यम से इन संपत्तियों को अर्जित किया है।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के बाद लोक निर्माण विभाग में भी प्रशासनिक और सतर्कता संबंधी हलचल बढ़ गई है। फिलहाल, EOW की विस्तृत जांच रिपोर्ट और संपत्तियों के अंतिम मूल्यांकन के बाद ही बालाघाट PWD अधिकारी द्वारा अर्जित की गई अनुपातहीन संपत्ति की वास्तविक राशि और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आ पाएगी।
