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एनजीओ की आड़ में 66 लाख की ठगी, पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया

गुना जिले में एक व्यक्ति ने कर्मचारियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एनजीओ खोला और फॉरेन फंडिंग का झांसा देकर करीब 66 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

Aug 10
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एनजीओ की आड़ में 66 लाख की ठगी, पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया

द क्लिफ न्यूज़ | 10 अगस्त 2026

गुना जिले के राघौगढ़ थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने एनजीओ खोलने और विदेशी फंडिंग दिलाने का लालच देकर एक स्थानीय व्यक्ति से लगभग 66 लाख रुपये की ठगी की है। पुलिस अधीक्षक गुना के निर्देश पर मामले की जांच के बाद राघौगढ़ पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।

यह ठगी का जाल आरोपी प्रमोद सिंह ने उस समय बुना, जब वह वर्ष 2022 में फरियादी राणा प्रताप सिंह के मकान में किरायेदार के तौर पर रह रहा था। पुलिस को दी गई शिकायत और जांच के दौरान यह बात सामने आई है।

कर्मचारियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग

सहायक उप निरीक्षक सीताराम धुर्वे द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी प्रमोद सिंह, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गया जिले का रहने वाला है, ने फरियादी राणा प्रताप सिंह को यह कहकर विश्वास में लिया कि वह एससी/एसटी वर्ग के आठ लोगों के साथ मिलकर एक एनजीओ खोलना चाहता है। इस योजना के तहत, आरोपी ने राणा प्रताप के होटल में काम करने वाले कर्मचारियों, जिनमें लक्ष्मण बंजारा, फूल सिंह बंजारा, मांगी बाई जाटव, धापू बाई जाटव, दिनेश स्वीपर, दीपक प्रजापति और मुकेश बंजारा शामिल थे, के पहचान संबंधी दस्तावेज प्राप्त किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसने एक्सिस बैंक में उनके नाम से खाते खुलवाए और सिम कार्ड, चेकबुक व एटीएम प्राप्त कर लिए। कर्मचारियों को नौकरी पर बने रहने के बदले 5,000 रुपये मासिक और सालाना 50,000 रुपये दिलाने का सब्जबाग दिखाया गया था।

45 लाख नगद और 21 लाख चेक से हड़पे

प्रमोद सिंह ने एनजीओ के संचालन और विदेशी फंडिंग दिलाने के झूठे वादे किए। अप्रैल 2022 से जुलाई 2024 के बीच, उसने राणा प्रताप और उनकी पत्नी कुसुम सिंह से कर्मचारियों के खातों में कुल 45,37,117 रुपये ट्रांसफर करवाए, जिन्हें बाद में आरोपी ने स्वयं निकाल लिया। इसके अतिरिक्त, एनजीओ के नाम पर उसने लगभग 21 लाख रुपये नकद भी फरियादी से हड़प लिए। आरोपी ने गुजरात कॉर्पोरेशन से लोन और विदेशी फंडिंग दिलाने के आश्वासन के साथ लाखों रुपये के स्टाम्प भी बनवाए, जिनका भुगतान फरियादी ने किया था।

अपने जाल को और मजबूत करने के लिए, प्रमोद सिंह ने राणा प्रताप और उनकी पत्नी के नाम पर यस बैंक के 10-10 लाख रुपये मूल्य के कुल 20 चेक भी दिए थे। उसने फरवरी 2024 में उनसे खाते से पैसे निकाल लेने को कहा था, जबकि सभी खातों का संचालन वह स्वयं कर रहा था। इस प्रकार, आरोपी ने कुल 66 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। बैंकों से प्राप्त स्टेटमेंट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर राघौगढ़ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।