एनआईटीटीटीआर भोपाल में 80वां स्वतंत्रता दिवस: तकनीकी शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का संकल्प
एनआईटीटीटीआर भोपाल में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर निदेशक प्रो. सी.सी. त्रिपाठी ने तकनीकी शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए ज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित सक्षम मानव संसाधन तैयार करने की आवश्यकता बताई।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 15 अगस्त 2026
राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल में 80वें स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। इस गरिमामयी अवसर पर संस्थान के निदेशक, प्रो. सी.सी. त्रिपाठी ने संस्थान के सभी पूर्व एवं वर्तमान अधिकारीगण, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा साथियों को संबोधित किया।
प्रो. त्रिपाठी ने स्वतंत्रता संग्राम के उन असंख्य ज्ञात और अज्ञात सेनानियों के अमूल्य त्याग व बलिदान को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि यह कर्तव्य, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज भारत अपनी युवा शक्ति, ज्ञान, उन्नत तकनीक और नवाचार के बल पर विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में, तकनीकी शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
तकनीकी शिक्षा का राष्ट्र निर्माण में योगदान
निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल इंजीनियर तैयार करना मात्र नहीं है, बल्कि ऐसे कुशल और सक्षम मानव संसाधन का निर्माण करना है, जो देश की जटिल सामाजिक एवं तकनीकी चुनौतियों को गहराई से समझ सकें और उनके प्रभावी समाधान विकसित करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि संस्थान, अपनी छह दशकों से अधिक की यात्रा में, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने और प्रशिक्षण के नए आयामों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सांस्कृतिक जड़ों का समन्वय
प्रो. त्रिपाठी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप, भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। उनके अनुसार, शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को ज्ञान अर्जित कराना नहीं है, बल्कि उनमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गहरी समझ, गर्व और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करना है। परंपरा और आधुनिक विज्ञान के इस सामंजस्यपूर्ण समन्वय से एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है, जो न केवल विद्यार्थियों को ज्ञानवान और कुशल बनाए, बल्कि उन्हें संवेदनशील और राष्ट्र निर्माण के लिए पूर्णतः समर्पित नागरिक के रूप में तैयार करे।
