एनआईटीटीटीआर भोपाल और आईजीएनसीए का एमओयू: भारतीय ज्ञान परंपराओं को शिक्षा में मिलेगी नई दिशा
भोपाल स्थित एनआईटीटीटीआर और दिल्ली के आईजीएनसीए के बीच समझौता, जिसके तहत भारतीय ज्ञान परंपराओं को तकनीकी व व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में जोड़ा जाएगा।

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: डॉ. पीके पुरोहित
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 11 सितंबर 2026
राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) नई दिल्ली ने भारतीय ज्ञान परंपराओं को देश की तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में एकीकृत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप यह पहल भारत की समृद्ध विरासत, विज्ञान, कला, संस्कृति और पारंपरिक प्रौद्योगिकी को समकालीन शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौते के तहत, एनआईटीटीटीआर भोपाल वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही भारतीय ज्ञान परंपराओं के क्षेत्र में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के कार्यक्रम शुरू करेगा। आईजीएनसीए इन पाठ्यक्रमों के विकास, शिक्षण पद्धतियों, शैक्षिक सामग्री के निर्माण और शोध कार्यों के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
ज्ञान परंपराओं का शैक्षणिक समावेश
एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक, प्रोफेसर चंद्र चारू त्रिपाठी ने इस साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल एक गौरवशाली इतिहास नहीं है, बल्कि विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी की एक जीवंत धारा है। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थान मिलकर भारतीय इतिहास, गणित, वास्तुकला और पारंपरिक तकनीकी ज्ञान से संबंधित विषयों पर संयुक्त शोध और प्रकाशन को बढ़ावा देंगे। आईजीएनसीए के विशाल अभिलेखीय संसाधनों का उपयोग डिजिटल अध्ययन सामग्री, ई-बुक्स और दृश्य-श्रव्य संसाधनों के विकास में किया जाएगा, जिससे छात्रों को उनकी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
संस्थानों की भूमिका और उद्देश्य
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव, डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि उनका संस्थान कला, संस्कृति और विरासत के संरक्षण व शोध के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है। उन्होंने कहा कि आईजीएनसीए का बहु-विषयक दृष्टिकोण साहित्य, वास्तुकला, शिल्प, संगीत, नृत्य और लोक परंपराओं जैसे विभिन्न आयामों को शैक्षणिक अध्ययन में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर आईजीएनसीए की विरासत संरक्षण प्रयोगशाला और प्रकाशन विभाग का दौरा भी किया गया, जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और समझ बढ़ी।
भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के प्रमुख, डॉ. पीके पुरोहित ने स्पष्ट किया कि यह सहयोग देश की ज्ञान धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ इसके समकालीन अनुप्रयोग को भी गति प्रदान करेगा। यह साझेदारी न केवल छात्रों और शिक्षकों को भारत की समृद्ध विरासत से जोड़ेगी, बल्कि उन्हें आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में इसके वैज्ञानिक, दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं को गहराई से समझने का अवसर भी प्रदान करेगी। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान डॉ. रामेंद्र सिंह, डॉ. सुधीर लाल सहित अन्य अधिकारी और संस्थान के सदस्य उपस्थित थे। यह शैक्षणिक गठबंधन आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है, जो अंततः छात्रों के लिए रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
