एअर इंडिया पायलट का गांजा टेस्ट पॉजिटिव, 300 फीट नीचे आई थी फ्लाइट
फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI2379 में 300 फीट की ऊंचाई गिरने और यात्रियों के घायल होने के मामले में पायलट का दूसरा डोप टेस्ट गांजे के लिए पॉजिटिव आया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 12 अगस्त 2026
फुकेट से नई दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI2379 के 4 अगस्त को अचानक करीब 300 फीट नीचे जाने और 24 यात्रियों व चालक दल के सदस्यों के घायल होने की घटना अब एक गंभीर मोड़ ले चुकी है। इस घटना के बाद कराए गए साइकोएक्टिव पदार्थों के परीक्षण में विमान के पायलट-इन-कमांड का दूसरा, पुष्टि वाला लैब टेस्ट मारिजुआना यानी गांजे के लिए पॉजिटिव पाया गया है। इस खुलासे ने विमानन सुरक्षा और पायलटों की फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत, घटना के तुरंत बाद दोनों पायलटों के साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए परीक्षण किए गए थे। पायलट-इन-कमांड के शुरुआती परीक्षण में ऐसे परिणाम सामने आए थे, जिसके बाद उसके नमूने को आगे की पुष्टि के लिए एक विशेष प्रयोगशाला भेजा गया था। अब इस पुष्टि-परीक्षण में मारिजुआना की मौजूदगी का परिणाम पॉजिटिव आने की जानकारी सामने आई है।
तकनीकी गड़बड़ियों की भी हो रही जांच
उड़ान AI2379, जो एक एयरबस A320 विमान द्वारा संचालित की जा रही थी, 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। क्रूज के दौरान, विमान ने अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। इस घटना में 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 20 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की सरकारी सूचना प्राप्त हुई थी। विमान बाद में स्थिर हो गया और सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतरा।
हालांकि, इस घटना के बाद जांच केवल सामान्य टर्बुलेंस तक सीमित नहीं रही। जांचकर्ताओं ने उड़ान के दौरान सामने आई कथित तकनीकी गड़बड़ियों की भी गहन पड़ताल शुरू की है। प्रारंभिक रिपोर्टों में ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने और हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। ऐसे में, पायलट के डोप टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम को विमान के अचानक नीचे जाने का सीधा और एकमात्र कारण मानना फिलहाल जल्दबाजी मानी जा रही है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की विस्तृत जाँच
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच एजेंसी द्वारा तकनीकी, परिचालन, मेडिकल और मानवीय पहलुओं को एक साथ खंगाला जा रहा है। AAIB ने किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की बात कही है और उपलब्ध साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर रहा है, जिसमें विमान के फ्लाइट डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से प्राप्त जानकारी शामिल है।
वर्तमान में, घटना में शामिल दोनों पायलटों को उनकी उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी होने और जांच के अंतिम परिणाम सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों से भी घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की है।
पायलटों की मेडिकल फिटनेस पर उठे सवाल
इस घटना ने भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की मेडिकल फिटनेस और साइकोएक्टिव पदार्थों के नियमित परीक्षण की व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। विमान संचालन में पायलट की मानसिक और शारीरिक स्थिति यात्रियों की सुरक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। ऐसे में, किसी पायलट के पुष्टि-परीक्षण में प्रतिबंधित साइकोएक्टिव पदार्थ का परिणाम सामने आना नियामक एजेंसियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पायलट के डोप टेस्ट में मारिजुआना की पुष्टि का 4 अगस्त को हुई 300 फीट की ऊंचाई में कमी से सीधा संबंध स्थापित करना उचित नहीं होगा। जांचकर्ताओं को मेडिकल रिपोर्ट, परीक्षण की प्रकृति और समय, विमान के तकनीकी आंकड़ों तथा उस विशिष्ट समय पर कॉकपिट में हुई गतिविधियों के बीच के संबंधों का विस्तृत विश्लेषण करना होगा।
एअर इंडिया की उड़ान AI2379 से जुड़ी यह घटना विमान सुरक्षा व्यवस्था के समक्ष दो समानांतर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करती है। एक ओर, उड़ान के दौरान अचानक हुई अप्रत्याशित ऊंचाई में कमी और उससे जुड़ी संभावित तकनीकी या परिचालन संबंधी परिस्थितियां, तो दूसरी ओर, पायलट के पुष्टि-परीक्षण में मारिजुआना की मौजूदगी। AAIB की विस्तृत जांच और संबंधित नियामकीय कार्रवाइयों से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पहलुओं की वास्तविक भूमिका क्या रही है।
