दुबई में सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 पार, व्यापार में 136% की वृद्धि
जून 2026 तक दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स में 85,841 भारतीय कंपनियां पंजीकृत हुईं। पिछले दशक में भारत-दुबई गैर-तेल व्यापार 136% बढ़कर 222.5 अरब दिरहम पर पहुंच गया।

द क्लिफ न्यूज़ | दुबई | 29 अगस्त 2026
संयुक्त अरब अमीरात का दुबई, भारतीय व्यवसायों और कंपनियों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। जून 2026 के अंत तक, दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स में सक्रिय रूप से पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या 85,841 तक पहुंच गई है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। पिछले एक वर्ष में, भारतीय कंपनियों की सदस्यता में 15% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से, जनवरी से जून 2026 के बीच ही 7,579 नई भारतीय कंपनियों ने दुबई चैंबर में पंजीकरण कराया है।
यह वृद्धि भारत और दुबई के बीच बढ़ते गैर-तेल व्यापार में भी परिलक्षित होती है। 2025 में, दोनों के बीच गैर-तेल व्यापार 222.5 अरब दिरहम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2016 में 94.2 अरब दिरहम था। इस प्रकार, एक दशक में व्यापार में 136.2% की वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले 2025 में, गैर-तेल व्यापार में 15% की वृद्धि हुई, जिसने भारत को दुबई का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना दिया है। पारंपरिक व्यापार के अलावा, नई तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्र भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे रहे हैं।
व्यापार और सेवाओं में भारतीय कंपनियों का दबदबा
दुबई में सक्रिय भारतीय कंपनियों की गतिविधियां विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई हैं, जिनमें व्यापार और सेवाओं का क्षेत्र सबसे प्रमुख है, जिसका कुल हिस्सेदारी में 45% योगदान है। इसके बाद रियल एस्टेट, लीजिंग और बिजनेस सर्विसेज का स्थान आता है, जिनकी हिस्सेदारी 27.3% है। निर्माण क्षेत्र 19% के साथ तीसरे स्थान पर है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारतीय व्यवसायी अब केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुबई में अपने कार्यालय स्थापित कर, दीर्घकालिक व्यापारिक संचालन, रियल एस्टेट कारोबार और विभिन्न सेवा क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं।
निवेश का बढ़ता प्रवाह
व्यापार के अलावा, निवेश के मोर्चे पर भी भारत और दुबई के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। 2016 से 2025 की अवधि के दौरान, भारत से दुबई में लगभग 32.3 अरब दिरहम का निवेश किया गया है, जिसमें अकेले 2025 में लगभग 8.4 अरब दिरहम का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) शामिल है। वहीं, दुबई स्थित कंपनियों ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। 2016 से 2025 के बीच, दुबई की कंपनियों ने भारत में 147 परियोजनाओं में 34.1 अरब दिरहम का निवेश किया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 55,274 रोजगार के अवसर पैदा हुए।
CEPA समझौते का प्रभावी असर
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मई 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है। दुबई चैंबर्स के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच दुबई और भारत के बीच गैर-तेल व्यापार में 35% की वृद्धि हुई है। इस समझौते ने व्यापारिक बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका सीधा प्रभाव भारतीय कंपनियों की दुबई में बढ़ती सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय कंपनियों के लिए दुबई की बढ़ती प्रासंगिकता
भारतीय कंपनियों के लिए दुबई के आकर्षण का मुख्य कारण इसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और उत्कृष्ट वैश्विक कनेक्टिविटी है। दुबई से कंपनियां न केवल संयुक्त अरब अमीरात के विशाल बाजार तक पहुंच पाती हैं, बल्कि मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए एक मजबूत मंच भी प्राप्त करती हैं। दुबई का अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा, अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री संपर्क, अनुकूल कारोबारी माहौल, तथा निवेशकों और ग्राहकों तक आसान पहुंच इसे भारतीय व्यवसायों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाते हैं। यही कारण है कि कई भारतीय उद्यमी दुबई को अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक आधार के रूप में देख रहे हैं।
AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भविष्य की योजनाएं
भारत-दुबई कारोबारी साझेदारी अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर Agentic AI, डीप टेक, फिनटेक और डिजिटल सेवाओं जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में भी प्रवेश कर रही है। दुबई द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के प्रयासों से भारतीय तकनीकी कंपनियों के लिए नए अवसरों के द्वार खुलने की प्रबल संभावना है। दुबई चैंबर्स भारतीय तकनीकी कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ AI क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। दुबई और बेंगलुरु के बीच एक संभावित AI कॉरिडोर की अवधारणा पर भी चर्चा हो रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय तकनीकी प्रतिभा को मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद करना है।
वैश्विक लॉन्चपैड के रूप में दुबई
दुबई में सक्रिय भारतीय कंपनियों की संख्या का 85,841 के पार पहुंचना, भारत के बढ़ते वैश्विक कारोबारी विस्तार का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। भारतीय कंपनियां अब दुबई को केवल खाड़ी क्षेत्र के बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे वैश्विक लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जहां से वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ा सकती हैं। भविष्य में, AI, डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, निर्माण और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत-दुबई सहयोग में और अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है। बढ़ता व्यापार, दोनों देशों के बीच निवेश का प्रवाह और हजारों नई भारतीय कंपनियों का दुबई में सक्रिय होना, इस आर्थिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहा है। यह बढ़ती उपस्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुबई में भारतीय कारोबारी समुदाय का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, और भारत-दुबई आर्थिक गलियारा आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।
