दुबई में भारतीय कंपनियों का दबदबा: ऑटो, इलेक्ट्रिकल से AI तक, 85,841 फर्में सक्रिय
दुबई में भारतीय कंपनियों का दायरा तेजी से बढ़ा है, जो अब ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, AI और डिजिटल जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर रही हैं। जून 2026 तक 85,841 भारतीय फर्में चैंबर से जुड़ीं।

द क्लिफ न्यूज़ | दुबई | 29 अगस्त 2026
दुबई में भारतीय कंपनियों का प्रभाव अब पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय तकनीक और डिजिटल कारोबार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है। भारतीय व्यवसाय अब दुबई को मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंचने के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के अंत तक 85,841 भारतीय कंपनियां सक्रिय सदस्य के रूप में पंजीकृत थीं। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में ही 7,579 नई भारतीय कंपनियां चैंबर से जुड़ीं, जो भारतीय कारोबारी समुदाय की तीव्र गति का प्रमाण है। भारत अब दुबई का सबसे बड़ा विदेशी कारोबारी समुदाय है, और दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक संबंध इस विस्तार को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।
ऑटोमोबाइल और EV में बढ़ी भारतीय कंपनियों की सक्रियता
दुबई का ऑटोमोबाइल बाजार भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण वितरण और निर्यात केंद्र के रूप में उभर रहा है। भारत में निर्मित कारों, उपयोगी वाहनों, दोपहिया वाहनों, ऑटो कंपोनेंट्स और संबंधित सेवाओं की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल रही है। ये कंपनियां अब केवल वाहनों की बिक्री तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि स्पेयर पार्ट्स, सर्विस नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, ऑटो फाइनेंस और आफ्टर-सेल्स सर्विस जैसे क्षेत्रों में भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
महिंद्रा जैसी प्रमुख भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियां मध्य पूर्व सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने ऑटोमोटिव कारोबार को मजबूत करने की रणनीति पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, कंपनी के ऑटोमोटिव निर्यात में 18.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
इस क्षेत्र में सबसे बड़ा परिवर्तन इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते बाजार के रूप में देखा जा रहा है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता में वृद्धि के साथ, भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक EV बाजार में प्रवेश की संभावनाएं भी प्रबल हुई हैं। दुबई की स्मार्ट मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर बढ़ती प्राथमिकता भारतीय EV निर्माताओं, बैटरी कंपनियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के लिए नए रास्ते खोल रही है। भारत में भी इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। महिंद्रा के लिए, 2025-26 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 57,472 इकाइयों तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की 14,183 इकाइयों से काफी अधिक है, जो भारतीय कंपनियों की EV क्षमता में तीव्र विस्तार का संकेत देता है।
इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण क्षेत्र में विस्तार
भारतीय व्यवसायों के विस्तार का एक अन्य प्रमुख क्षेत्र इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग है। विद्युत उपकरण, औद्योगिक मशीनरी, केबल, स्विचगियर, ऊर्जा उपकरण, स्मार्ट डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से संबंधित भारतीय कंपनियां दुबई के माध्यम से पश्चिम एशिया और अफ्रीकी बाजारों तक अपनी पहुंच बना रही हैं। दुबई का सुविकसित बंदरगाह, एयर कार्गो नेटवर्क और कुशल अंतरराष्ट्रीय व्यापार ढांचा इन कंपनियों को अपने उत्पादों को तेजी से पहुंचाने और विभिन्न बाजारों में वितरण नेटवर्क स्थापित करने में सहायता करता है।
निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी भारतीय कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान बना हुआ है। दुबई चैंबर के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कंपनियों की कुल गतिविधियों में रियल एस्टेट, लीजिंग और बिजनेस सर्विसेज की हिस्सेदारी 27.3 प्रतिशत है, जबकि निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 19 प्रतिशत है। दुबई में लगातार हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास, नए आवासीय और वाणिज्यिक प्रोजेक्ट्स, तथा पर्यटन-आधारित निर्माण गतिविधियों ने भारतीय इंजीनियरिंग, निर्माण, इंटीरियर डिजाइन और रियल एस्टेट कंपनियों के लिए एक विशाल बाजार सृजित किया है।
पारंपरिक व्यापार के साथ डिजिटल सेवाओं का संगम
हालांकि भारतीय कंपनियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी, जो कि 45 प्रतिशत है, अभी भी ट्रेड और सर्विसेज में है, लेकिन अब इस पारंपरिक कारोबार के साथ तकनीक, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सेवाएं तेजी से जुड़ रही हैं। यह बदलाव भारतीय कारोबारी समुदाय की बदलती रणनीति को उजागर करता है। पहले जहां दुबई में भारतीय कंपनियां मुख्य रूप से आयात-निर्यात और व्यापार पर केंद्रित थीं, वहीं अब वे स्थानीय संचालन, क्षेत्रीय मुख्यालय स्थापित करने और वैश्विक विस्तार के लिए दुबई का रणनीतिक उपयोग कर रही हैं।
निवेश और व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि
भारत और दुबई के बीच व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ निवेश संबंध भी मजबूत हुए हैं। वर्ष 2016 से 2025 के बीच, भारत से दुबई में लगभग 32.3 अरब दिरहम (लगभग 70,000 करोड़ रुपये) का निवेश आया, जिसमें अकेले 2025 में 8.4 अरब दिरहम (लगभग 18,000 करोड़ रुपये) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। वहीं, दुबई की कंपनियों ने इसी अवधि के दौरान भारत में 147 परियोजनाओं में 34.1 अरब दिरहम (लगभग 73,000 करोड़ रुपये) का निवेश किया, जिससे लगभग 55,274 रोजगार के अवसर सृजित हुए।
दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। 2025 में दुबई का भारत के साथ गैर-तेल व्यापार 222.5 अरब दिरहम (लगभग 4.7 लाख करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक था। 2016 में यह कारोबार 94.2 अरब दिरहम था, जिसका अर्थ है कि एक दशक में भारत-दुबई गैर-तेल व्यापार में 136.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2022 में लागू हुए भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद, 2022 से 2025 के बीच गैर-तेल व्यापार में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर भविष्य की नजर
भारतीय कंपनियों की अगली बड़ी छलांग डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपेक्षित है। दुबई चैंबर्स ने भारतीय उद्योग संगठनों के साथ उन्नत तकनीक, व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते किए हैं। दुबई और बेंगलुरु के बीच एक संभावित AI कॉरिडोर की चर्चा भी इस उभरते कारोबारी रिश्ते का एक महत्वपूर्ण संकेत है। इसका उद्देश्य भारतीय तकनीकी प्रतिभा और कंपनियों को दुबई के माध्यम से मध्य पूर्व, अफ्रीका और CIS देशों के बाजारों तक एक सहज पहुंच प्रदान करना है।
भारतीय कंपनियों की बढ़ती संख्या और विभिन्न क्षेत्रों में उनके विस्तार से यह स्पष्ट है कि दुबई अब भारतीय कारोबारियों के लिए केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक आधार के रूप में उभर रहा है। ऑटोमोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिकल, निर्माण से लेकर रियल एस्टेट और पारंपरिक व्यापार से लेकर AI व डिजिटल सेवाओं तक, भारतीय कंपनियों का यह बहुआयामी विस्तार दुबई की अर्थव्यवस्था में उनकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत-दुबई कारोबारी सहयोग के और तेज होने की प्रबल संभावना है। 85,841 सक्रिय भारतीय कंपनियां, 222.5 अरब दिरहम का गैर-तेल व्यापार और दोनों दिशाओं में अरबों दिरहम का निवेश, ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दुबई में भारतीय कारोबार का प्रभाव अब व्यापक और बहुआयामी हो चुका है।
