डिजिटल उपभोक्ता सशक्तिकरण: भोपाल में विशेषज्ञों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और अधिकारों पर मंथन किया
भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा आयोजित कार्यशाला में डिजिटल उपभोक्ताओं के अधिकारों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव और प्रभावी शिकायत निवारण पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 18 अगस्त 2026
डिजिटल क्रांति ने उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी और वित्तीय लेन-देन को अभूतपूर्व रूप से सुगम बनाया है, लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसी नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं। इस परिदृश्य में, उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को उपभोक्ता सशक्तिकरण की अनिवार्य शर्त माना जा रहा है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सोमवार को विशेषज्ञों के साथ एक व्यापक मंथन का आयोजन किया।
कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में 'डिजिटल उपभोक्ता को सशक्त बनाना: अधिकार, निवारण और सुरक्षित लेन-देन' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और साइबर विशेषज्ञों ने भाग लिया। मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की सहभागिता से हुई इस संगोष्ठी का उद्देश्य डिजिटल बाजार में उपभोक्ताओं के समक्ष उभर रही चुनौतियों और उनके प्रभावी समाधानों पर गहन विचार-विमर्श करना था।
बदलते डिजिटल परिदृश्य में धोखाधड़ी के नए आयाम
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मध्यप्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्रीमती सुनीता यादव ने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल फोन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं। जहाँ इन डिजिटल माध्यमों ने बाज़ार तक पहुँच और लेन-देन को अत्यंत सुविधाजनक बना दिया है, वहीं धोखाधड़ी और छल के तरीके भी उसी रफ़्तार से विकसित हो रहे हैं। न्यायमूर्ति यादव ने कहा कि उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतें दर्ज कराने की प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाना आवश्यक है, ताकि उन्हें जटिलताओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मजबूत कानूनों के साथ-साथ ऐसे जागरूक नागरिकों की भी आवश्यकता है जो अपने अधिकारों को समझें और डिजिटल लेन-देन करते समय पूर्ण सावधानी बरतें। उन्होंने विधि के विद्यार्थियों और युवाओं को उपभोक्ता जागरूकता अभियानों से जोड़ने की महत्ता पर बल दिया, यह कहते हुए कि एक सुरक्षित और निष्पक्ष डिजिटल वातावरण के निर्माण में जहाँ कानून की भूमिका महत्वपूर्ण है, वहीं नागरिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है।
डिजिटल सुविधा के साथ बढ़ी जिम्मेदारियां
आयोग के रजिस्ट्रार श्रीमन् शुक्ला ने बदलते तकनीक और व्यापार के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहाँ उपभोक्ताओं के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ है, वहीं ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, व्यक्तिगत जानकारी की चोरी एवं दुरुपयोग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल लेन-देन से संबंधित शिकायतों की प्रकृति भी बदल रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके शिकायतों की निगरानी, मध्यस्थता और समाधान प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
5.17 करोड़ उपभोक्ताओं तक डिजिटल पहुँच
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के आयुक्त दिनेश जैन ने बताया कि उनका विभाग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आधारित उपार्जन के माध्यम से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं और किसानों के साथ सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पीडीएस के तहत वर्तमान में लगभग 5.17 करोड़ उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। आयुक्त जैन ने डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से पारदर्शिता, जवाबदेही, समय पर भुगतान और शिकायत निवारण में आए सकारात्मक बदलावों को भी उजागर किया।
डेटा सुरक्षा और फर्जी रिव्यूज बनीं प्रमुख चिंताएँ
आयोग की सदस्य डॉ. मोनिका मलिक ने डिजिटल बाजार के तीव्र विस्तार के साथ उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था को लगातार विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विलंबित डिलीवरी, ऑनलाइन फर्जी रिव्यूज, भ्रामक संस्थाओं द्वारा उपभोक्ता डेटा का दुरुपयोग और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता जैसे मुद्दों को प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया।
साइबर धोखाधड़ी से बचाव के व्यावहारिक उपाय
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, ई-कॉमर्स में उपभोक्ता अधिकार, अनुचित व्यापार व्यवहार, उत्पाद दायित्व, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ऑनलाइन शिकायत निवारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन चर्चा की गई। साइबर स्टेट सेल के पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी ने साइबर अपराध की वर्तमान स्थिति और उसके बदलते तौर-तरीकों पर एक विशेष संबोधन प्रस्तुत किया। अधिवक्ता यशवर्धन सिंह रघुवंशी ने '10 बातें जो हर उपभोक्ता को पता होनी चाहिए' विषय पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण पहलुओं को अत्यंत सरल और बोधगम्य तरीके से समझाया।
भरोसेमंद डिजिटल बाज़ार की आवश्यकता
कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों के विमर्श का मुख्य सार यही रहा कि डिजिटल परिवर्तन का अंतिम उद्देश्य केवल लेन-देन को आसान बनाना मात्र नहीं है, बल्कि उपभोक्ता के लिए एक ऐसे बाजार का निर्माण करना भी है जो अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सर्वोपरि, भरोसेमंद हो। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड की सहज उपलब्धता, शिकायत की स्थिति की पारदर्शी जानकारी, समयबद्ध समाधान प्रक्रियाएँ, सुरक्षित डिजिटल भुगतान व्यवस्थाएँ और नेटवर्क या प्रमाणीकरण संबंधी समस्याएँ आने पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं का होना अत्यंत आवश्यक है। मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की प्रशासकीय अधिकारी सुश्री पूर्णिमा शर्मा ने आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन की पुष्टि की।
