डिजिटल रुपये से मिलेगा राशन: एमपी के भोपाल-इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर में दिसंबर 2026 तक डिजिटल रुपये से राशन वितरण शुरू होगा। यह पायलट प्रोजेक्ट पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में पारदर्शिता लाएगा।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 5 अगस्त 2026
मध्यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में एक अभूतपूर्व डिजिटल क्रांति लाने की तैयारी में है। देश में पहली बार, भारतीय रिजर्व बैंक की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) का उपयोग करके राशन का वितरण किया जाएगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत इस महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रदेश के भोपाल और इंदौर जिलों से दिसंबर 2026 तक होने की उम्मीद है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाएगी, जिससे लीकेज और सब्सिडी के दुरुपयोग पर अंकुश लगेगा।
इस नई व्यवस्था के तहत, पात्र हितग्राहियों को हर महीने उनकी खाद्यान्न पात्रता के अनुसार सीबीडीसी टोकन सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में भेजे जाएंगे। राशन प्राप्त करने के लिए, लाभार्थी को अपनी उचित मूल्य दुकान पर उपलब्ध क्यूआर कोड को अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से स्कैन करना होगा। टोकन के सफल उपयोग के उपरांत, गेहूं, चावल और अन्य पात्रता अनुसार खाद्यान्न हितग्राही को प्राप्त हो जाएगा। यह कदम सरकारी सहायता के दुरुपयोग को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि डिजिटल रुपया केवल राशन खरीदने के लिए ही मान्य होगा, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं।
डिजिटल पीडीएस: पारदर्शी वितरण की ओर एक कदम
खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के अनुसार, इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्यप्रदेश खाद्य विभाग, पंजाब नेशनल बैंक, एनआईसी और अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच कई दौर की बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शामिल रही है। योजना के प्रारंभिक चरण में, लाभार्थियों के आधार और राशन कार्ड के डेटा का मिलान, मोबाइल नंबर का सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके उपरांत, हितग्राहियों को पीएनबी डिजिटल रुपया मोबाइल ऐप पर ऑनबोर्ड किया जाएगा। वहीं, सभी उचित मूल्य दुकानों को क्यूआर-आधारित सीबीडीसी भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा और दुकानदारों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे इस नई तकनीक को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सार्वजनिक वितरण प्रणाली को न केवल कैशलेस और पेपरलेस बनाएगी, बल्कि वितरण प्रक्रिया में अभूतपूर्व पारदर्शिता भी लाएगी। यह सरकारी सहायता के शत-प्रतिशत पारदर्शी हस्तांतरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो मध्यप्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां डिजिटल रुपया सीधे जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में स्थापित होगा। यह भविष्य में अन्य कल्याणकारी योजनाओं में सीबीडीसी के उपयोग के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
देश का सबसे बड़ा डिजिटल राशन प्रयोग
यह डिजिटल प्रयोग कई मायनों में खास है। पहली बार राशन वितरण में डिजिटल रुपये का उपयोग किया जा रहा है, जो इसे एक अनूठी पहल बनाता है। लाभार्थी के मोबाइल वॉलेट में सीधे डिजिटल टोकन का पहुंचना, प्रक्रिया को सुगम और त्वरित बनाएगा। क्यूआर कोड स्कैन करके किसी भी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त करने की सुविधा, उपभोक्ताओं के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करेगी।
इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग और वितरण श्रृंखला में होने वाले लीकेज को प्रभावी ढंग से रोकना है। भोपाल और इंदौर में यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर, इसके पूरे प्रदेश और अंततः पूरे देश में लागू होने की संभावना बढ़ जाएगी। यह भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं के एकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित कर सकता है।
