डीजीपी मकवाणा ने युवा आईपीएस अधिकारियों को दिए पुलिसिंग के प्रभावी नेतृत्व के गुर
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अधिकारियों से संवाद करते हुए जनता को त्वरित राहत, अधीनस्थों के मार्गदर्शन और निष्पक्ष पुलिसिंग पर जोर दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 17 सितंबर 2026
पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने हाल ही में अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुके 10 सहायक पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभावी पुलिस नेतृत्व की पहचान जनता को त्वरित राहत पहुंचाना और अपने अधीनस्थों को उचित मार्गदर्शन देना है। पुलिस मुख्यालय भोपाल में आयोजित एक सौजन्य भेंट के दौरान, डीजीपी श्री मकवाणा ने युवा अधिकारियों के साथ पुलिस व्यवस्था, पर्यवेक्षण और जमीनी स्तर की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन संवाद किया।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओपी) के रूप में, वे पुलिस व्यवस्था के पहले पर्यवेक्षण अधिकारी होते हैं। इसलिए, पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आम जनता की शिकायतों का समाधान करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। डीजीपी ने सुझाव दिया कि पीड़ित की शिकायत को प्रारंभिक स्तर पर ही गंभीरता से समझना और उसके त्वरित निराकरण का प्रयास करना चाहिए, ताकि लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
नेतृत्व में ईमानदारी और निष्पक्षता का महत्व
श्री मकवाणा ने पुलिस नेतृत्व के लिए ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ प्रभावी पर्यवेक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि वे अपने अधीनस्थों के कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा करें, उनकी समस्याओं को समझें और समयबद्ध तरीके से उनका समाधान सुनिश्चित करें। डीजीपी के अनुसार, एक अच्छे अधिकारी का कर्तव्य केवल कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें अधीनस्थों को प्रेरित करना, उनका मार्गदर्शन करना और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करना भी शामिल है। यह नेतृत्व का एक अभिन्न अंग है जो संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
थानों के निरीक्षण और सीसीटीवी की भूमिका
पुलिस महानिदेशक ने थानों के निरीक्षण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान पुलिस कार्यप्रणाली की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिरासत में न रखा जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे हमेशा चालू और कार्यशील स्थिति में हों। यह अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। डीजीपी ने अधिकारियों को थानों का नियमित और औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया, ताकि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले नियमित निरीक्षणों में सक्रिय रूप से भाग लेने और इस प्रक्रिया के दौरान पुलिसिंग की बारीकियों को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। डीजीपी का मानना था कि जमीनी अनुभव और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन से पुलिसिंग की व्यावहारिक समझ विकसित होती है, जिसका लाभ अधिकारी अपनी आगे की सेवा में उठा सकते हैं।
तकनीकी पुलिसिंग और NAFIS का उपयोग
डीजीपी श्री मकवाणा ने आधुनिक तकनीक पर आधारित पुलिसिंग के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपराधों और विभिन्न प्रकरणों के समाधान में उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) जैसी प्रणालियों से मिलने वाली फिंगरप्रिंट संबंधी तकनीकी सहायता का उपयोग करके अपराधों के समाधान को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। यह प्रणाली जांच एजेंसियों को त्वरित और सटीक जानकारी प्रदान करने में सहायक होती है।
थाना परेड और अनुशासन का महत्व
थाने की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने में थाना परेड की महत्ता को स्वीकार करते हुए डीजीपी ने कहा कि नियमित परेड के माध्यम से बल की उपस्थिति, अनुशासन, वर्दी का रखरखाव, टर्नआउट और आवश्यक निर्देशों की जानकारी सुनिश्चित की जा सकती है। यह न केवल बल के मनोबल को बढ़ाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि सभी अधिकारी और जवान नियमों और निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
समस्याओं का जड़ से समाधान
पुलिस सेवा में प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की चुनौतियां और समस्याएं सामने आती हैं। डीजीपी श्री मकवाणा ने अधिकारियों को सलाह दी कि समस्याओं से बचने के बजाय, उनकी जड़ तक पहुंचना और उपलब्ध संसाधनों तथा नियमों के अनुरूप उनका समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जो नेतृत्व अपने अधीनस्थों की समस्याओं का समाधान करता है, वही संगठन में विश्वास और एक बेहतर कार्य संस्कृति विकसित कर पाता है।
इस अवसर पर, सहायक पुलिस अधीक्षकों ने पुलिसिंग और नेतृत्व से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार और जिज्ञासाएं साझा कीं। डीजीपी श्री मकवाणा ने अपने विशाल अनुभव के आधार पर अधिकारियों के प्रश्नों का मार्गदर्शन किया और उन्हें सेवा के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस बैठक में पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर और एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन भी उपस्थित रहे।
