देवरी नगरपालिका अध्यक्ष को फर्जी हस्ताक्षर मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत
देवरी नगरपालिका अध्यक्ष नेहा जैन को जबलपुर हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। फर्जी हस्ताक्षर मामले में अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई पर...

द क्लिफ न्यूज़ | 24 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के देवरी में नगरपालिका अध्यक्ष नेहा अलकेश जैन को जबलपुर उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की अदालत ने फर्जी हस्ताक्षर के मामले में दर्ज प्राथमिकी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक जैन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान पुलिस जांच जारी रह सकती है। यह फैसला देवरी नगरपालिका में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ अध्यक्ष के पद पर आंच आने की संभावना थी।
यह मामला देवरी नगरपालिका के भीतर चल रही राजनीतिक गहमागहमी और शक्ति संतुलन के प्रयासों का भी संकेत देता है। अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह की प्राथमिकी दर्ज होना, और फिर उसे उच्च न्यायालय में चुनौती देना, स्थानीय प्रशासन में चल रहे जटिल समीकरणों को उजागर करता है। न्यायालय द्वारा अंतरिम राहत प्रदान करने का निर्णय, मामले की अगली सुनवाई तक स्थगन की स्थिति बनाए रखेगा।
फर्जी हस्ताक्षर मामले में प्राथमिकी दर्ज
जानकारी के अनुसार, देवरी पुलिस थाने में नगरपालिका अध्यक्ष नेहा जैन के विरुद्ध एक पार्षद द्वारा फर्जी हस्ताक्षर के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत के आधार पर, 24 जून 2026 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
यह प्राथमिकी, नगरपालिका पार्षद द्वारा प्रस्तुत किए गए कथित साक्ष्यों पर आधारित थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि अध्यक्ष के हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर कुछ दस्तावेजों में हेरफेर किया गया है। इस तरह के आरोप, विशेष रूप से सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ, गंभीर जांच का विषय होते हैं और यदि साबित हो जाएं तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पद से हटाए जाने तक की नौबत आ सकती है।
न्यायालय में याचिका और अंतरिम राहत
इस प्राथमिकी को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए नेहा जैन ने स्थगन की मांग की थी। उनकी ओर से पेश हुए अधिवक्ता आदित्य अवस्थी ने दलील दी कि पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना समुचित जांच के एक प्रायोजित प्रकरण जल्दबाजी में दर्ज किया है। यह भी आरोप लगाया गया कि सुनवाई का अवसर दिए बिना और राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उन्हें पद से हटाने के उद्देश्य से यह मामला दर्ज कराया गया है।
अधिवक्ता अवस्थी ने न्यायालय को बताया कि प्राथमिकी दर्ज करने से पूर्व नियमानुसार की जाने वाली जांच प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला द्वेषपूर्ण भावना से प्रेरित होकर, केवल अध्यक्ष को बदनाम करने और उनके पद से हटाने की नीयत से दर्ज कराया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस मामले को जल्दबाजी में दर्ज किया गया है, जिससे याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया।
मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने 23 जुलाई को पुलिस से कोर्ट डायरी तलब की है। साथ ही, याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि पुलिस इस अवधि में अपनी जांच जारी रख सकती है।
न्यायालय का यह आदेश, प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि याचिकाकर्ता की दलीलों में कुछ दम है, जिसके कारण अंतरिम राहत प्रदान की गई है। हालांकि, पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति मिलने से यह स्पष्ट है कि मामले की सत्यता का पता लगाने के लिए जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अगली सुनवाई पर कोर्ट डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय आगे का निर्णय लेगा।
