देवरी में रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर विशाल शोभायात्रा, शिक्षा और कुरीति निवारण पर जोर
सागर के देवरी में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर भव्य शोभायात्रा निकली। सांसद राहुल लोधी ने समाज को शिक्षित और कुरीति मुक्त बनाने का आह्वान किया।

द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 23 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी नगर में रविवार को वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें समाजबंधुओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाईस्कूल परिसर से प्रारंभ होकर यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी और कृषि उपज मंडी प्रांगण में एक विशाल आमसभा के रूप में संपन्न हुई।
शोभायात्रा के दौरान वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की झांकियों का जगह-जगह पुष्प वर्षा और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। नगर में स्थापित अन्य महापुरुषों की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
शिक्षा और सामाजिक सुधार पर वक्ताओं के विचार
मंडी प्रांगण में आयोजित आमसभा को क्षेत्रीय सांसद राहुल सिंह लोधी, लोधी क्षत्रिय समाज के प्रदेश अध्यक्ष जालम सिंह पटेल, बंडा विधायक बीरेंद्र सिंह लोधी 'लंबरदार' सहित अन्य गणमान्य वक्ताओं ने संबोधित किया। सांसद राहुल सिंह लोधी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देवरी क्षेत्र में सामाजिक जनों के सामूहिक प्रयासों से तेरहवीं जैसे आयोजनों में होने वाले अनावश्यक व्यय जैसी कुरीतियों में कमी आ रही है। उन्होंने समाज के युवाओं से शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा अपनी पूरी क्षमता के साथ मेहनत करने का आग्रह किया।
लोधी क्षत्रिय समाज के प्रदेश अध्यक्ष जालम सिंह पटेल ने वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी के ऐतिहासिक जीवन और उनके अदम्य साहस पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रानी अवंतीबाई का जन्म 16 अगस्त 1831 को सिवनी जिले के मनकेहड़ी गांव में हुआ था। उनका विवाह रामगढ़ राज्य के राजकुमार विक्रमादित्य सिंह लोधी से संपन्न हुआ था। पति के अस्वस्थ होने की स्थिति में, उन्होंने अपने पुत्रों के संरक्षण के साथ-साथ रामगढ़ राज्य की जिम्मेदारी कुशलतापूर्वक संभाली थी।
1857 की क्रांति में रानी अवंतीबाई का योगदान
जालम सिंह पटेल ने आगे कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, जब ब्रिटिश सरकार 'हड़प नीति' जैसे औपनिवेशिक कानूनों को लागू कर रही थी, तब रानी अवंतीबाई ने इसका कड़ा प्रतिरोध किया। उन्होंने लगभग चार हजार सैनिकों की एक सशक्त सेना का गठन किया और अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूंका। मंडला के समीप खैरी गांव में हुई एक निर्णायक लड़ाई में उन्होंने अंग्रेजी सेना के विरुद्ध असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया। बाद में, देवहरगढ़ की पहाड़ियों में अंग्रेजों से घिर जाने पर, उन्होंने 20 मार्च 1858 को मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
आदर्शों को अपनाने का आह्वान
पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं लोधी समाज महिला प्रदेश अध्यक्ष तृप्ती लोधी ने वीरांगना रानी अवंतीबाई के साहस, स्वाभिमान और बलिदान को नमन किया। उन्होंने समाज के युवाओं से रानी अवंतीबाई के आदर्शों को आत्मसात करने और उन्हें समाज तथा युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने समाज को शिक्षित बनाने और शराब जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त करने पर भी जोर दिया। युवा प्रदेश अध्यक्ष सर्वजीत सिंह कानोनी और गुड्डू अमोदा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समस्त वक्ताओं ने समाज को शिक्षित, नशामुक्त और सुसंगठित बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में समाजबंधुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन की सफलता को रेखांकित किया। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न समुदायों के लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व जिला पंचायत सदस्य तृप्ति सिंह लोधी, जनपद सदस्य बीरेंद्र लोधी सेमराखेड़ी, लक्ष्मण सिंह लोधी सिलारपुर, प्रीतम सिंह लोधी, इंद्रराज लोधी, लोधी समाज के देवरी ब्लॉक अध्यक्ष कमलेश लोधी खेड़ी, अरविंद लोधी, अंकित दीवान, राजेंद्र लोधी, पुष्पेंद्र लोधी, दामोदर लोधी, रत्नेश लोधी, राहुल लोधी, राजेंद्र लोधी पुरैना, सत्यम लोधी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और समाज के सदस्य उपस्थित रहे।
