देवरी के सांदीपनि विद्यालय परिसर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
देवरी स्थित सांदीपनि विद्यालय भवन के परिसर में बन रही सीसी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार मानकों का पालन नहीं कर रहा है और सड़क की मोटाई निर्धारित मापदंडों से कम है।

द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 6 अगस्त 2026
सागर जिले के देवरी स्थित शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जिसका हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा उद्घाटन किया गया था, अब अपने परिसर में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा में है। विद्यालय भवन में पहली बरसात में ही पानी रिसाव की घटना सामने आने के बाद, अब परिसर में बनाई जा रही कंक्रीट (सीसी) सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने ठेकेदार पर निर्माण मानकों का उल्लंघन करने और सरकारी धन की बर्बादी का आरोप लगाया है।
लगभग 36 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस विद्यालय भवन के आसपास, ठेकेदार द्वारा जो सीसी सड़क बनाई जा रही है, उसकी मोटाई निर्धारित मापदंडों से काफी कम होने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मोटाई मात्र 2 से 3 इंच रखी जा रही है, जबकि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में इससे कहीं अधिक मोटाई और एक मजबूत आधार की आवश्यकता होती है। सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण में न तो हार्ड कोट का प्रयोग किया जा रहा है और न ही वाइब्रेटर का, तथा केवल स्थानीय स्तर की छोटी गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जो सड़क की मजबूती और टिकाऊपन को प्रभावित कर सकता है।
गुणवत्ता पर फिर उठी उंगली
इससे पहले, विद्यालय भवन में पानी रिसाव की घटना ने निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उस समय पत्रकारों द्वारा खबर प्रकाशित करने और सागर कलेक्टर के निरीक्षण के बाद, ठेकेदार को सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, देवरी अनुविभागीय अधिकारी, संबंधित अधिकारी और स्कूल प्रबंधन को निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नियमित देखरेख के निर्देश भी दिए गए थे। इन निर्देशों के बावजूद, अब सीसी सड़क के निर्माण में कथित अनियमितताएं सामने आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। नागरिकों का मानना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने शैक्षणिक परिसर में इस तरह के घटिया निर्माण कार्य भविष्य में बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकते हैं और सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंताजनक हैं।
स्थानीय नागरिकों ने की जांच की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और निर्माण स्थल पर एक तकनीकी टीम भेजकर सड़क की मोटाई, गुणवत्ता और उपयोग की जा रही सामग्री की गहन जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले की समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह सड़क जल्दी ही टूट सकती है, जिससे न केवल असुविधा होगी बल्कि सरकारी धन की भी भारी हानि होगी। इस निर्माण कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जिम्मेदार अधिकारियों से कार्रवाई की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराने और यदि ठेकेदार या संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण को एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है, और ऐसे आरोप इन प्रक्रियाओं पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
पारदर्शिता और निगरानी पर प्रश्नचिह्न
विद्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में इस प्रकार की निर्माण संबंधी शिकायतें बार-बार सामने आना, सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इतने बड़े बजट वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निगरानी अत्यंत आवश्यक है, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो और निर्मित संरचनाएं लंबे समय तक टिकाऊ रहें।
अनुविभागीय अधिकारी का पक्ष
इस मामले में देवरी के अनुविभागीय अधिकारी मुनव्वर खान ने कहा कि स्कूल भवन निर्माण के टेंडर में तीन वर्ष तक के मरम्मत का नियम शामिल है। यदि भवन या सड़क तीन साल के भीतर जर्जर होती है, तो ठेकेदार को उसका पुनः निर्माण कराना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान निर्माण कार्य सही ढंग से हो रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। नागरिकों की उम्मीद है कि उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी, ताकि सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता बनी रहे।
