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दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ACB के शिकंजे में

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) में कथित घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने गिरफ्तार किया है। जैन के साथ पांच अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है।

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दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ACB के शिकंजे में

द क्लिफ न्यूज़ | दिल्ली | 18 अगस्त 2026

दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन एक बार फिर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के शिकंजे में आ गए हैं। मंगलवार को पार्टी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एसीबी ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पांच अन्य अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया है। यह गिरफ्तारी दिल्ली के जल विभाग में एक बड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले से जुड़ी है, जो लंबे समय से जांच के दायरे में थी।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के विस्तार और उन्नयन से संबंधित टेंडरों में की गई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इन टेंडरों की शर्तों में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 6.73 करोड़ रुपये के अवैध कमीशन और रिश्वत का लेन-देन हुआ है, जो नकद और बैंकिंग माध्यमों से किया गया। इस कथित भ्रष्टाचार में सत्येंद्र जैन की भूमिका के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों व कंपनियों के भी शामिल होने का आरोप है।

जल बोर्ड टेंडर में हेरफेर के आरोप

जांच एजेंसियों द्वारा सामने लाए गए तथ्यों के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। यह आरोप लगाया गया है कि टेंडर की शर्तों में फेरबदल कर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाया गया। इतना ही नहीं, यह भी सामने आया कि काम का एक हिस्सा एक अन्य कंपनी को सब-कॉन्ट्रैक्ट के तौर पर दे दिया गया, जो टेंडर की शर्तों के अनुसार संभव नहीं था। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका जताई जा रही है। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस मामले में लगभग 17.70 करोड़ रुपये के अपराध की आय उत्पन्न करने और उपयोग करने का आरोप लगाया है, जिसमें सत्येंद्र जैन, डीजेबी अधिकारी और निजी पक्ष शामिल हैं।

सत्येंद्र जैन का पूर्व रिकॉर्ड और आप का पक्ष

यह पहली बार नहीं है जब सत्येंद्र जैन जांच एजेंसियों के निशाने पर आए हैं। इससे पहले भी उन पर भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोप लगे हैं और वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी एजेंसियों की जांच का सामना कर चुके हैं। मई 2022 में ईडी ने उन्हें धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। एसीबी ने उनके खिलाफ एक अलग सीसीटीवी परियोजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें दिल्ली सरकार द्वारा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) पर लगाए गए जुर्माने को माफ करने के बदले रिश्वत लेने का आरोप था।

दिल्ली जल बोर्ड के इस कथित घोटाले के संबंध में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियां विपक्षी दलों के नेताओं को निशाना बनाने के लिए उनका दुरुपयोग कर रही हैं। आप का कहना है कि यह कार्रवाई आगामी चुनावों को देखते हुए विरोधियों को कमजोर करने का प्रयास है। इसके विपरीत, भाजपा और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती रही हैं और निष्पक्ष तथा कानून-आधारित कार्रवाई की बात कहती आई हैं।

मामले की वर्तमान स्थिति और भविष्य की राह

सत्येंद्र जैन की यह नई गिरफ्तारी दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। आम आदमी पार्टी की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाएगा और उनकी कानूनी रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से इस गिरफ्तारी के कारणों, जुटाए गए सबूतों और अन्य गिरफ्तार किए गए पांचों व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने का इंतजार है।

कानूनी प्रक्रिया के तहत, किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने तक निर्दोष माना जाता है। इस मामले में जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्य और आरोपियों के बचाव पक्ष की दलीलें ही यह तय करेंगी कि दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में किसकी क्या भूमिका रही है। आगे की जांच और अदालती कार्यवाही से ही इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आएगी।