BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
State

दतिया उपचुनाव: शुरुआती बढ़त के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पराजित

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी मतगणना के शुरुआती दौर में आगे रहने के बावजूद कांग्रेस के हाथों हार गए।

Few hours ago
2 मिनट में पढ़ें
दतिया उपचुनाव: शुरुआती बढ़त के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पराजित

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 3 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना के अंतिम परिणाम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उस समय झटका लगा जब उसके प्रत्याशी आशुतोष तिवारी शुरुआती बढ़त के बावजूद कांग्रेस के हाथों पराजित हुए। इस हार के साथ ही भाजपा के लिए यह उपचुनाव एक प्रतिष्ठा की लड़ाई साबित हुआ, जिसमें उसे अंततः निराशा हाथ लगी।

3 अगस्त 2026 को संपन्न हुई मतगणना में, प्रारंभिक चरण में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने खासी बढ़त बना ली थी। पहले राउंड में उन्हें 4,651 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 3,367 मत और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव को 1,917 मत मिले थे। इस चरण में भाजपा लगभग 1,000 वोटों से आगे चल रही थी, जिससे पार्टी खेमे में जीत की उम्मीदें बलवती हो गई थीं।

मतगणना के बदलते रुझान और अंतिम परिणाम

हालांकि, जैसे-जैसे मतगणना के अन्य राउंड आगे बढ़े, चुनावी परिदृश्य तेजी से बदला। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की और अंततः भाजपा की शुरुआती बढ़त को पार कर लिया। देर शाम तक चले मतगणना प्रक्रिया के अंत में, कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत हासिल की और भाजपा के आशुतोष तिवारी को पराजय का सामना करना पड़ा।

दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया गया था। इस महत्वपूर्ण मुकाबले में भाजपा ने अपने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर युवा नेता आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया था। वहीं, कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव ने भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर चुनौती पेश की।

इस उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा था। प्रारंभिक रुझानों में भाजपा का आगे रहना कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक था, लेकिन अंतिम परिणाम ने मतदाताओं के बदलते मिजाज और चुनावी समीकरणों को उजागर किया, जिससे भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।