दमोह: फुटेरा तालाब पर बैरिकेडिंग विवाद के बाद दुर्गा विसर्जन सुचारू
दमोह के फुटेरा तालाब पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बैरिकेडिंग को लेकर नगर पालिका अधिकारी और उत्सव समिति के सदस्यों में विवाद हो गया,...

Damoh | संवाददाता: सोनू अठया
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 20 अक्टूबर 2026
दमोह स्थित फुटेरा तालाब पर दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान बैरिकेडिंग व्यवस्था को लेकर नगर पालिका अधिकारी और रेलवे स्टेशन दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस विवाद के चलते प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्य कुछ समय के लिए बाधित रहा, जिससे उत्सव के माहौल में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब समिति के पदाधिकारियों का नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) राजेंद्र सिंह लोधी से बैरिकेडिंग की व्यवस्थाओं को लेकर मतभेद हुआ। दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों ने सीएमओ पर अभद्रता का आरोप लगाया, जबकि सीएमओ का कहना था कि समिति के सदस्य उन्हें धमका रहे थे। यह बहस काफी देर तक चली, जिससे विसर्जन के लिए जुटे श्रद्धालु और अन्य लोग भी परेशान हुए।
विसर्जन स्थल पर व्यवस्थाओं पर टकराव
फुटेरा तालाब, जो प्रतिमा विसर्जन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है, पर दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए थे। इसी दौरान, विसर्जन स्थल पर की गई बैरिकेडिंग को लेकर समिति और नगर पालिका के बीच असहमति पैदा हो गई। समिति के सदस्यों का आरोप था कि नगर पालिका द्वारा की गई व्यवस्थाएं उचित नहीं थीं और इससे श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही थी। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष था कि भीड़ और सुरक्षा को नियंत्रित करने के लिए यह आवश्यक था।
तनाव के बाद सुचारू हुआ विसर्जन कार्य
दोनों पक्षों के बीच हुई इस तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के कारण विसर्जन प्रक्रिया कुछ समय के लिए पूरी तरह रुक गई। आसपास का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन और समिति के बीच मध्यस्थता का प्रयास किया गया। विभिन्न पक्षों की समझाइश के बाद, आखिरकार दोनों पक्षों के बीच गतिरोध समाप्त हुआ और विवाद को सुलझा लिया गया। इसके पश्चात्, दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्य पुनः प्रारंभ हो सका और सभी प्रतिमाओं को सुरक्षित रूप से तालाब में विसर्जित किया गया।
स्थानीय प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए उत्सव समितियों और नगर पालिका के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल पर जोर दिया है, ताकि सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
