दमोह: पंचमुखी लोधेश्वर महादेव जयंती पर पांच दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण
नोहटा में पांच दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण का आयोजन, श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से किया अभिषेक और पूजन, महाआरती के बाद किया गया विसर्जन।

द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 8 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के नोहटा नगर में पंचमुखी लोधेश्वर महादेव की जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य पांच दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण का आयोजन किया गया है। इस आयोजन के पहले दिन सत्यनारायण मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और उत्साहपूर्वक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। भक्तों ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, कपूर, दूध और भस्म जैसी पवित्र सामग्री से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर विशेष पूजन-अर्चन किया।
शिवलिंग निर्माण और अभिषेक पूजन के पश्चात, मंदिर परिसर में भगवान शिव की महाआरती का आयोजन किया गया। भक्तिमय वातावरण में 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा ग्राम गूंज उठा। इसके उपरांत, निर्मित पार्थिव शिवलिंग की शोभायात्रा निकाली गई, जो व्यार मा नदी के जल धारा में विसर्जित की गई। इस दौरान पूरा क्षेत्र शिव भक्ति के रंग में सराबोर रहा।
शिवलिंग पूजन का धार्मिक महत्व
इस अवसर पर उपस्थित आचार्य पं. उमाशंकर शास्त्री ने बताया कि देवों के देव महादेव भगवान शिव को कल्याणकारी देवता के रूप में पूजा जाता है। श्रावण माह में शिवलिंग का अभिषेक अनेक मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। यही कारण है कि सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और उसकी अर्चना को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सनातन काल से ऋषि-मुनियों द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अभिषेक की विधि अपनाई जाती रही है।
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण मिट्टी या गोबर से किया जाता है, जो प्रकृति का ही एक रूप है। मान्यता है कि इस विधि से शिव की आराधना करने से धन, संतान और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सावन का पवित्र माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस महीने में किए गए पूजन-अभिषेक का फल कई गुना अधिक मिलता है।
शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है और इसका वर्णन विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करने से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल शिव को अत्यंत प्रिय हैं, जिन्हें अर्पित करने से भगवान प्रसन्न होते हैं।
इस आयोजन में आचार्य पं. शिवम् तिवारी, लकी गौतम, पुरुषोत्तम दुबे और स्थानीय ग्रामीणों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही, जिन्होंने इस धार्मिक अनुष्ठान में सहयोग किया। पांच दिवसीय इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय समुदाय में धार्मिक आस्था और भक्ति का संचार हुआ है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामुदायिक एकता और सहभागिता को भी बढ़ावा देता है।
