दमोह नगर पालिका सीएमओ से मारपीट: कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
दमोह नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी राजेंद्र लोधी के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने दोषियों...

Damoh | संवाददाता: सोनू अठया
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 21 अक्टूबर 2026
दमोह नगर पालिका में कार्यरत मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) राजेंद्र लोधी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने स्थानीय प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। इस गंभीर वारदात के विरोध में नगर पालिका के समस्त कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपना कड़ा रोष व्यक्त किया है। कर्मचारियों ने डिप्टी कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कर्मचारियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सार्वजनिक पद पर आसीन अधिकारियों के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रशासन से यह अपेक्षा जताई है कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एक पारदर्शी जांच प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाए। कर्मचारियों का स्पष्ट मत है कि जांच के उपरांत जो भी व्यक्ति इस घटना में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार अधिकतम दंड का प्रावधान लागू होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा का सवाल
नगर पालिका के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने इस ज्ञापन के माध्यम से अपनी कार्यस्थल पर सुरक्षा और गरिमा को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकारी कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण मिलना अत्यंत आवश्यक है। ज्ञापन में उठाई गई मांगों के अनुसार, प्रशासन को इस मामले में किसी भी प्रकार के दबाव या पक्षपात से मुक्त रहते हुए न्यायोचित निर्णय लेना होगा। कर्मचारियों ने इस उम्मीद के साथ अपनी बात रखी है कि जिला प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए त्वरित और निर्णायक कदम उठाएगा।
यह घटना सार्वजनिक सेवा में लगे व्यक्तियों के प्रति अनादर और हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति को भी रेखांकित करती है, जिसे संबोधित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। कर्मचारियों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र के सुचारू संचालन में भी बाधा उत्पन्न करती हैं। इसलिए, इस मामले में की जाने वाली कार्रवाई न केवल दोषियों को दंडित करने के लिए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए एक नज़ीर पेश करने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव
इस घटना के बाद से ही दमोह नगर पालिका के कार्यालय में चर्चाओं का माहौल गरमाया हुआ है और कर्मचारी लगातार इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं। ज्ञापन में उल्लिखित मांगों को प्रशासन के उच्चाधिकारियों तक पहुँचा दिया गया है। वर्तमान में, सभी की निगाहें जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। कर्मचारियों ने यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि मामले में उचित और समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने विरोध को और अधिक मुखर रूप देने पर विचार कर सकते हैं।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से, इस पूरे प्रकरण का संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में सामने आया है। डिप्टी कलेक्टर को सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद अब एक आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने की प्रबल संभावना है। नगर पालिका प्रशासन के भीतर अनुशासन बनाए रखने और कानून व्यवस्था के प्रति नागरिकों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए इस मामले का निष्पक्ष समाधान अनिवार्य माना जा रहा है। कर्मचारियों की प्रतिक्रिया इस बात की ओर इशारा करती है कि वे अपने अधिकारी के समर्थन में मजबूती से खड़े हैं और न्याय की बाट जोह रहे हैं।
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उसे न केवल न्याय सुनिश्चित करना है, बल्कि कर्मचारियों के मनोबल को भी बनाए रखना है। एक निष्पक्ष और त्वरित जांच से न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि यह भी संदेश जाएगा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कर्मचारियों की मांग है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हो और किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त रहे, ताकि अंतिम निर्णय तथ्यों पर आधारित हो।
आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने घटना के विस्तृत विवरण को प्रशासन के समक्ष रखा और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि जांच में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही न बरती जाए। दमोह के प्रशासनिक गलियारों में यह मामला चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है, और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि दोषियों पर कब तक और किस प्रकार की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। कर्मचारी इस बात पर अडिग हैं कि जब तक दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका असंतोष बना रहेगा। प्रशासन की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में उत्सुकता के साथ-साथ चिंता का भाव भी व्याप्त है। अब यह देखना शेष है कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले को किस प्रकार सुलझाता है और न्याय की स्थापना कैसे सुनिश्चित करता है।
कर्मचारियों ने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से प्रशासन के समक्ष रख दी हैं और अब वे जवाब का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन की ओर से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो वे आंदोलन के अगले चरण पर विचार करने के लिए बाध्य होंगे। यह स्थिति न केवल दमोह नगर पालिका के लिए, बल्कि प्रदेश के अन्य प्रशासनिक निकायों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है, कि कैसे सार्वजनिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
