दमोह में UNDP-समर्थित परियोजना की परिसंपत्तियों का पंचायतों को हस्तांतरण
दमोह जिले में UNDP-समर्थित प्राकृतिक संसाधन संरक्षण परियोजना की परिसंपत्तियों का ग्राम पंचायतों को हस्तांतरण किया गया। इसका उद्देश्य जलवायु अनुकूल कृषि और आजीविका को सुदृढ़ करना है।

द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 26 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा समर्थित और द एनर्जी रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) द्वारा समन्वित एक महत्वपूर्ण परियोजना के तहत विकसित की गई परिसंपत्तियों को अब स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है। यह परियोजना, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है, पिछले दो वर्षों से तेंदूखेड़ा विकासखंड के छह गांवों में संचालित की जा रही थी।
नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स एंड एनवायरनमेंट (NCHSE), भोपाल द्वारा संचालित इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करना और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना था। इसके तहत, पंचायत भूमि पर सघन पौधरोपण, पशुओं के लिए चारागाह का विकास, और अन्य उपयोगी ढांचागत परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया।
सामुदायिक परिसंपत्तियों का विधिवत हस्तांतरण
इस परियोजना के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में, 25 अगस्त को ग्राम पंचायत देवरी लीलाधर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह में, परियोजना के अंतर्गत निर्मित सभी परिसंपत्तियों, जैसे कि पंचायत भूमि पर किए गए वृक्षारोपण और विकसित किए गए सामुदायिक चारागाहों को, ग्राम समुदाय के उपयोग एवं दीर्घकालीन संरक्षण हेतु विधिवत ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, दमोह के कृषि वैज्ञानिक श्री बी. एल. साहू, उद्यानिकी विभाग, दमोह के श्री एम. एल. अहिरवार, NCHSE के कार्यकारी निदेशक श्री लोकेंद्र ठक्कर, उप निदेशक श्री अविनाश श्रीवास्तव एवं श्री राजेश वर्मा सहित ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि श्री इमरत सिंह लोधी, पंचायत सचिव और बड़ी संख्या में ग्रामीण व किसान शामिल हुए।
जलवायु अनुकूल कृषि पर जोर
हस्तांतरण समारोह के दौरान, कृषि विशेषज्ञों ने उपस्थित किसानों को खरीफ, रबी और जायद फसलों के लिए उन्नत कृषि तकनीकों, प्रभावी फसल प्रबंधन और उद्यानिकी संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। बदलती जलवायु परिस्थितियों के मद्देनजर, उन्होंने किसानों को टिकाऊ और उपयुक्त कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे बदलते मौसम के प्रभाव से अपनी फसलों को बचा सकें और बेहतर उपज प्राप्त कर सकें।
NCHSE के उप निदेशक श्री अविनाश श्रीवास्तव ने परियोजना के उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य केवल परिसंपत्तियों का निर्माण करना नहीं था, बल्कि स्थानीय समुदायों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग से जोड़ना था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ग्राम समुदाय की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता ही परियोजना से निर्मित परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक संरक्षण और स्थायी प्रभाव को सुनिश्चित कर सकती है।
स्थानीय प्रतिबद्धता और सतत उपयोग
कार्यक्रम के समापन पर, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने परियोजना के माध्यम से विकसित की गई परिसंपत्तियों के संरक्षण और उनके निरंतर व विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे इन बहुमूल्य संपदाओं का ध्यान रखेंगे और इनका उपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुनिश्चित करेंगे।
