दमोह में दिखा नौ सिरों वाला रावण, दशहरे पर पुतले की बनावट बनी चर्चा का विषय
दमोह में विजयादशमी पर नौ सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया गया। परंपरा से हटकर बनाई गई इस अनूठी बनावट ने लोगों के...

Damoh | संवाददाता: सोनू अठया
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 20 अक्टूबर 2026
दमोह के तहसील खेल मैदान में विजयादशमी के पावन अवसर पर आयोजित रामलीला मंचन के बाद रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। बुराई पर अच्छाई की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में इस बार एक विशेष बात देखने को मिली, जिसने स्थानीय लोगों के बीच काफी चर्चा बटोरी।
परंपरागत रूप से रावण के दस सिर होते हैं, लेकिन इस बार दहन के लिए तैयार किए गए रावण के पुतले में केवल नौ सिर ही नजर आए। पुतले की यह अनूठी और असामान्य बनावट वहां उपस्थित दर्शकों के लिए कौतूहल का विषय बनी रही। रात्रि लगभग 10 से 11 बजे के बीच निर्धारित समय पर रावण के पुतले को अग्नि के हवाले किया गया, जिसके साक्षी बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक बने।
इस वर्ष के रावण दहन कार्यक्रम में विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने भगवान राम के चरित्र, रावण के अहंकार और अंततः उसकी हार का सजीव चित्रण किया। रामलीला के समापन के पश्चात, रावण दहन की प्रतीक्षारत भीड़ का उत्साह चरम पर था।
त्रुटिपूर्ण बनावट ने पैदा की जिज्ञासा
रामलीला मंचन के बाद रावण दहन की प्रक्रिया के दौरान, उपस्थित जनसमूह ने इस दृश्य को देखा और बुराई पर अच्छाई की जीत के संकल्प को दोहराया। नौ सिर वाले रावण का पुतला दहन स्थल पर मौजूद लोगों के बीच एक विशेष चर्चा का केंद्र बन गया। आयोजकों द्वारा निर्धारित परंपरा के अनुरूप कार्यक्रम को संपन्न किया गया, परंतु पुतले की इस त्रुटिपूर्ण बनावट ने इस वर्ष के रावण दहन को आम लोगों के बीच एक खास चर्चा का विषय बना दिया।
दर्शकों में इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं थीं। कुछ लोगों ने इसे कारीगर की भूल बताया, तो कुछ ने इसे किसी विशेष संकेत के रूप में देखा। हालांकि, आयोजकों ने इस ओर अधिक ध्यान न देते हुए कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराया। पुतले की बनावट भले ही परंपरा से हटकर थी, लेकिन इसने निश्चित रूप से इस वर्ष के विजयादशमी पर्व को दमोहवासियों के लिए अविस्मरणीय बना दिया।
इस वर्ष के रावण दहन की खास बात पुतले के नौ सिरों का होना था, जिसके कारण यह आयोजन अन्य वर्षों की अपेक्षा अधिक चर्चा में रहा। तहसील खेल मैदान में एक बड़ा जनसमूह इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए एकत्रित हुआ था।
