दमोह: जर्जर स्कूल भवन बच्चों की जान खतरे में, प्रशासन बेखबर
दमोह जिले के पण्डा प्रायमरी शाला का 50 साल पुराना जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। छत से पत्थर गिर रहे हैं और दीवारों में दरारें हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 3 अगस्त 2026
दमोह जिले के हिण्डोरिया के पास ग्राम पण्डा स्थित प्रायमरी शाला का 50 साल पुराना जर्जर भवन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। भवन की खस्ताहाल स्थिति के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से आंखें मूंदे हुए हैं।
ग्राम मित्र मंडल के अध्यक्ष दशरथ आदिवासी और समाज शिल्पी सुजात खान ने बताया कि स्कूल परिसर में मौजूद दो कमरों वाला यह पुराना भवन बेहद जर्जर हो चुका है। भवन की छत से आए दिन पत्थर गिरते रहते हैं और दीवारें जगह-जगह से ढह रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि भवन की दीवारों और दरारों से सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतु निकल रहे हैं।
सुरक्षा की अनदेखी, मौत के साये में बच्चे
इस जीर्ण-शीर्ण भवन के नीचे से ही शाला में पढ़ने वाले छोटे-छोटे आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के बच्चों को शौचालय, किचन और हैंडपंप तक आने-जाने के लिए गुजरना पड़ता है। कई बार तो बच्चे टपकते छज्जे के पत्थरों की चपेट में आने और जहरीले कीड़ों के शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं। इसके बावजूद, प्रशासन द्वारा इस जानलेवा स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौन
ग्रामीणों, शाला प्रबंधन समिति और शाला प्रमुख ने इस गंभीर समस्या को लेकर शिक्षा विभाग और जिला परियोजना अधिकारी को कई बार लिखित आवेदन और मौखिक शिकायतें की हैं। उनकी मांग है कि इस जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त किया जाए। हालांकि, विभाग न तो स्वयं इसे गिरवा रहा है और न ही स्कूल प्रबंधन को इसे गिराने की अनुमति दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामवासियों और शाला परिवार ने प्रशासन से समय रहते इस जर्जर भवन को गिराकर बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला परियोजना अधिकारी और संबंधित विभाग की होगी।
