दलित उत्पीड़न: कोर्ट के आदेश पर एसओ सहित 5 पर SC/ST एक्ट में केस दर्ज
इटावा में खेत में मजदूरी से इनकार करने पर एक दलित व्यक्ति को कथित तौर पर एसओ बकेवर विपिन मलिक और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा पीटा...

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 24 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में थाना बकेवर के स्टेशन ऑफिसर (एसओ) विपिन मलिक और चार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एससी/एसटी एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह आदेश एक विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित किया गया है, जिसमें एक दलित व्यक्ति अजय कुमार ने कथित तौर पर खेत में जबरन मजदूरी करने से इनकार करने पर एसओ और पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट व जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद, एसओ विपिन मलिक अपने पद पर बने हुए हैं।
पीड़ित अजय कुमार, जो गोपियापुरा कर्वा बुजुर्ग गांव के निवासी हैं और कठेरिया जाति से आते हैं, ने अपनी शिकायत में कहा है कि वे अक्टूबर 2025 से रामसरोवर नामक व्यक्ति के खेत में पानी लगाने का काम कर रहे थे। आरोप है कि 11 जनवरी 2026 को, गांव के आशुतोष पाण्डेय और चन्द्रमोहन पाण्डेय ने कथित तौर पर अजय कुमार को जातिसूचक गालियां देते हुए अपने खेत में काम करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। जब अजय कुमार ने बताया कि वह पहले से ही कहीं और काम कर रहे हैं और वहां उन्हें समय पर भुगतान मिल रहा है, तो उन्होंने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी, साथ ही झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी।
एसओ और पुलिस पर मारपीट का आरोप
शिकायत के अनुसार, 25 फरवरी 2026 की शाम को, अजय कुमार रामसरोवर के यहां से काम खत्म कर अपने घर लौटे ही थे कि आशुतोष पाण्डेय और चन्द्रमोहन पाण्डेय ने एसओ विपिन मलिक से मिलकर पुलिसकर्मियों को साथ ले जाकर उन्हें पकड़वा लिया। आरोप है कि एसओ विपिन मलिक और अन्य पुलिसकर्मियों ने अजय कुमार और उनके भाई अनूप कुमार को जातिसूचक गालियां देते हुए पीटा। जब अजय कुमार की पत्नी रामजानकी ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उन्हें भी कथित तौर पर जातिसूचक गालियां दी गईं और पीटा गया।
इसके बाद, आशुतोष पाण्डेय और चन्द्रमोहन पाण्डेय के कहने पर, अजय कुमार को बकेवर थाने ले जाया गया, जहां एसओ विपिन मलिक और कांस्टेबल ने कथित तौर पर थाने में भी उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। अजय कुमार का कहना है कि जब उन्होंने मारपीट से मना किया तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे सब कुछ भुला देंगे और यदि उन्होंने किसी उच्च अधिकारी से शिकायत की तो उन्हें व उनके परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा दिया जाएगा।
मेडिकल जांच और कार्रवाई की मांग
अजय कुमार को 26 फरवरी 2026 की शाम को छोड़ दिया गया, लेकिन आरोप है कि उस समय उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। अगले दिन, 27 फरवरी 2026 को, अजय कुमार ने इटावा जिला अस्पताल में अपना स्वयं का मेडिकल कराया, जिसमें उनके शरीर पर कई बाहरी और अंदरूनी चोटें पाई गईं। अजय कुमार ने इस घटना की ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन उनका दावा है कि कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी के आदेश पर थाना बकेवर में विपिन मलिक (एसओ बकेवर), आशुतोष पाण्डेय, चन्द्रमोहन पाण्डेय, रामसरोवर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जिम्मेदारी सीओ को सौंपी गई है। यह घटना स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के लिए एक चुनौती पेश करती है, खासकर तब जब एक वरिष्ठ अधिकारी पर कानून के उल्लंघन और दलितों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हों।
संवेदनशील पद पर बने एसओ पर सवाल
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने पर प्रारंभिक जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में, गंभीर आरोपों के सामने आने पर आरोपी अधिकारी को तत्काल पद से हटाया जा सकता है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। हालांकि, इस मामले में एसओ विपिन मलिक के चार्ज पर बने रहने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या निष्पक्ष जांच संभव हो पाएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीओ की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या पुलिस विभाग इस मामले में तत्काल कोई कार्रवाई करता है।
पिछले साल नवंबर 2025 में, एसओ विपिन कुमार मलिक इटावा जिले में एक पुलिस मुठभेड़ में शामिल थे, जिसमें एक वांटेड अपराधी घायल हो गया था और एक कांस्टेबल को गोली लगी थी। यह घटना उनके कार्यकाल के दौरान हुई एक अन्य महत्वपूर्ण घटना थी, हालांकि इस बार उन पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं।
