डकैती अधिनियम 1981 निरस्त करने की मांग, डॉ. गोविन्द सिंह ने CM को लिखा पत्र
पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 'मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981' को निरस्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि प्रदेश में अब डकैत गिरोह सक्रिय नहीं हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | 12 अगस्त 2026
पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर 'मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981' को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। डॉ. सिंह का तर्क है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह अधिनियम अप्रसांगिक हो गया है और इसका दुरुपयोग हो रहा है।
अपने पत्र में डॉ. गोविन्द सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2007 में राज्य के अंतिम सूचीबद्ध डकैत जगजीवन परिहार के मारे जाने के बाद से मध्य प्रदेश और विशेष रूप से चंबल क्षेत्र में किसी भी डकैत गिरोह की सक्रियता नहीं रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और 2012 में तत्कालीन राज्य गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता जैसे गणमान्य व्यक्तियों ने भी समय-समय पर प्रदेश से डकैती की समस्या की समाप्ति को स्वीकार किया है।
अप्रचलित कानून का दुरुपयोग और प्रभाव
डॉ. गोविन्द सिंह ने चिंता व्यक्त की कि डकैत गिरोहों के न होने के बावजूद, 'मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981' के तहत पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2020 से फरवरी 2023 के बीच, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के छह जिलों में इस कानून के तहत 922 प्राथमिकी दर्ज की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिनियम की धारा 5, जो अग्रिम जमानत पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है, और धारा 6, जो विशेष न्यायालयों का प्रावधान करती है, नागरिकों के मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करती हैं।
पूर्व मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि छोटे-मोटे आपराधिक मामलों में भी इस सख्त कानून के तहत कार्रवाई होने से स्थानीय युवाओं और छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्हें ऐसी कानूनी कार्रवाई के कारण भविष्य में अवसरों से वंचित होना पड़ सकता है।
अधिनियम का इतिहास और वर्तमान स्थिति
'मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम' 6 अक्टूबर 1981 को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य उस समय प्रदेश में सक्रिय डकैती और अपहरण की घटनाओं से निपटना था। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। राज्य पुलिस द्वारा अंतिम सूचीबद्ध डकैत के मारे जाने के बाद, चंबल क्षेत्र की छवि में बड़ा बदलाव आया है। बावजूद इसके, अधिनियम का बने रहना और उसका कथित दुरुपयोग चिंता का विषय बना हुआ है। डॉ. सिंह ने जनहित को सर्वोपरि मानते हुए इस पुराने और अप्रसंगिक हो चुके कानून को तत्काल निरस्त करने की अपील की है।
