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CWG 2026: अस्मिता डे ने जूडो में स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाली अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया है। 23 वर्षीय अस्मिता ने 48 किग्रा वर्ग में कनाडा की हाइडी क्वाच को 'गोल्डन स्कोर' में हराकर यह उपलब्धि हासिल की।

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CWG 2026: अस्मिता डे ने जूडो में स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास

द क्लिफ न्यूज़ | ग्लासगो | 31 जुलाई 2026

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो का परचम लहराया है। भारत की 23 वर्षीय जूडोका अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया है। इस जीत के साथ ही अस्मिता राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। ग्लासगो में खेले गए इस मुकाबले ने देश के खेल प्रेमियों के लिए एक गर्व का क्षण रचा है।

निर्धारित समय तक स्कोर बराबर रहने के बाद रोमांचक फाइनल मुकाबला 'गोल्डन स्कोर' यानी सडन डेथ में चला गया। इस निर्णायक क्षण में अस्मिता डे ने अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए सटीक दांव लगाया और कनाडा की शीर्ष खिलाड़ी हाइडी क्वाच को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। यह मुकाबला खेल की अनिश्चितताओं और खिलाड़ियों के जुझारूपन का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा।

संघर्ष और जज्बे की मिसाल

अस्मिता डे की यह स्वर्णिम सफलता मात्र एक खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके वर्षों के कड़े संघर्ष, अटूट जुनून और विपरीत परिस्थितियों पर विजय पाने की कहानी है। वह एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं; उनके पिता जीवन यापन के लिए साइकिल की मरम्मत का काम करते हैं। आर्थिक तंगी और सीमित साधनों के बावजूद, अस्मिता ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। स्थानीय अखाड़ों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने तक का उनका सफर देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

जीत के बाद अस्मिता ने कहा, "मैच के आखिरी पलों में मुझे बस अपने पिता का चेहरा और उनकी मेहनत याद आ रही थी। यह मेडल सिर्फ मेरा नहीं, उनके संघर्षों और पूरे देश की दुआओं का नतीजा है।"

भारतीय जूडो में नया अध्याय

कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारतीय जूडो ने अब तक कई रजत और कांस्य पदक जीते थे, लेकिन स्वर्ण पदक का इंतजार दशकों से बना हुआ था। अस्मिता डे की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल उस सूखे को समाप्त किया है, बल्कि भारतीय जूडो के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखा है। यह उपलब्धि भारतीय खेल परिदृश्य में जूडो को और अधिक प्रोत्साहन देने का काम करेगी।

अस्मिता की इस अभूतपूर्व सफलता पर खेल जगत, सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं। उनकी जीत ने एक बार फिर साबित किया है कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।