CJP ने प्रदर्शनकारियों पर FIR को बताया अनुचित, मानहानि केस की वकालत
CJP के सौरव दास ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के आरोप में युवा महिला पर दर्ज जीरो FIR को आपराधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

द क्लिफ न्यूज़ | नोएडा | 31 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में नोएडा निवासी एक 25 वर्षीया महिला रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज की गई 'जीरो एफआईआर' को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दास ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक न्याय प्रणाली के इस्तेमाल को अनुचित करार देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई के बजाय मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर किया जाना चाहिए।
यह मामला 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन से जुड़ा है। वायरल हुए एक वीडियो के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक महिला ने प्रधानमंत्री और संवैधानिक पद के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह ने नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराई। चूंकि घटना का स्थल दिल्ली था, इसलिए नोएडा पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच दिल्ली पुलिस के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने को सौंप दी है।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस तरह की कार्यवाही एक 'चिलिंग इफेक्ट' (Chilling Effect) डालती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आपत्तिजनक या अनुचित भाषा के इस्तेमाल के आधार पर किसी युवा को आपराधिक मामलों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। दास के अनुसार, यदि किसी को किसी की भाषा से आपत्ति है, तो उस व्यक्ति को मानहानि की कानूनी प्रक्रिया अपनाने की स्वतंत्रता है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक तंत्र का दुरुपयोग बेहद निंदनीय है।
आपराधिक तंत्र के दुरुपयोग पर CJP की चिंता
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक तंत्र का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है। केवल आपत्तिजनक या अनुचित भाषा के इस्तेमाल के आधार पर किसी युवा को आपराधिक मामलों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। यदि किसी को भाषा से आपत्ति है, तो वह व्यक्ति मानहानि (Defamation) की कानूनी प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वतंत्र है।”
CJP के प्रवक्ता ने देश के युवाओं से भी अपील की कि वे विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनी भाषा और शब्दों के चयन को लेकर सतर्क और जिम्मेदार रहें। उन्होंने पुलिस प्रशासन को भी सलाह दी कि वे राजनीतिक दबाव में आकर युवाओं के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई करने से बचें। CJP ने मांग की है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं पर दर्ज किए गए आपराधिक मामलों को वापस लिया जाए।
भारतीय न्याय संहिता की धाराएं और शिकायत
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), धारा 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और धारा 356(1) (मानहानि) शामिल हैं। शिकायतकर्ता वकील स्मृति सिंह ने आरोप लगाया है कि वीडियो में आरोपी महिला ने देश के प्रधानमंत्री और संवैधानिक पद के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।
जीरो एफआईआर का प्रावधान तब होता है जब कोई अपराध किसी अन्य क्षेत्राधिकार में हुआ हो, लेकिन एफआईआर किसी अन्य थाने में दर्ज कराई जाती है। इसके बाद उस एफआईआर को उस थाने में भेजा जाता है, जहां अपराध हुआ है। इस मामले में, नोएडा पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर उसे दिल्ली पुलिस को हस्तांतरित कर दिया है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस हस्तांतरित एफआईआर के आधार पर मामले की आगे की कानूनी जांच कर रही है। CJP के इस रुख से प्रदर्शनों के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छिड़ गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं, विशेष रूप से CJP की इस दलील पर कि ऐसे मामलों को आपराधिक दायरे में लाने के बजाय सिविल मानहानि के तहत निपटाया जाना चाहिए।
