राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायमूर्ति कांत को दिलाई CJI की शपथ; न्यायिक दृष्टि, बड़े फैसलों और आगामी चुनौतियों पर देश की नज़र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को न्यायमूर्ति कांत को भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। विशेष बात यह रही कि...

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को न्यायमूर्ति कांत को भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। विशेष बात यह रही कि शपथ समारोह ठीक उन दिनों के भीतर हुआ, जब 16वीं राष्ट्रपति संदर्भ पीठ में न्यायमूर्ति कांत ने सलाह दी थी कि राष्ट्रपति और राज्यपालों पर राज्य विधेयकों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने शपथ हिंदी में ग्रहण की।
भारतीय न्यायिक दृष्टिकोण पर जोर
नवनियुक्त CJI कांत और उनके पूर्ववर्ती न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की हाल ही में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सराहना की थी। मेहता ने कहा था कि दोनों न्यायाधीशों ने अपने फैसलों में विदेशी कानूनों का सहारा लिए बिना भारतीय न्यायशास्त्र और वैधानिक विरासत पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया—जिससे ‘भारतीयता’ की स्पष्ट पहचान मिलती है।
न्यायमूर्ति कांत और न्यायमूर्ति गवई दोनों को एक ही दिन, 24 मई 2019, को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था।
सौहार्द का संदेश—नए CJI के लिए पुराना वाहन आरक्षित
शपथ के बाद एक प्रतीकात्मक कदम में न्यायमूर्ति गवई ने CJI के लिए आरक्षित आधिकारिक वाहन स्वयं अलग रखकर सुनिश्चित किया कि न्यायमूर्ति कांत अपनी पहली यात्रा सुप्रीम कोर्ट तक मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक वाहन में ही करें। इसे न्यायपालिका के भीतर परंपरा और सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है।
संवाद-प्रधान न्यायशैली: किसान आंदोलन से लेकर संवेदनशील विवादों तक
न्यायमूर्ति कांत को उन न्यायाधीशों में गिना जाता है जो टकराव की बजाय संवाद और समाधान का रास्ता पसंद करते हैं।
कृषि कानूनों के विरोध के दौरान उन्होंने किसानों और केंद्र सरकार दोनों को वार्ता पर लौटने के लिए प्रेरित किया था—एक ऐसे समय में जब आंदोलन चरम पर था और गतिरोध गहराता जा रहा था।
आगामी चुनौतियाँ—SIR प्रक्रिया, लंबित मामले, संवैधानिक प्रश्न
1. SIR (Special Intensive Revision) मामला
उनका कार्यकाल विशेष रूप से SIR प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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अब तक उनकी पीठ ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं।
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लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
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यह प्रक्रिया बिहार से शुरू होकर अब 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ नागरिकों तक पहुँच चुकी है।
2. सुप्रीम कोर्ट में भारी लंबित मामले
मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा है कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता सुप्रीम कोर्ट में लंबित 90,000 से अधिक मामलों को ‘व्यवहारिक और प्रबंधनीय संख्या’ तक लाना है।
अदालत ने हाल में कहा था कि कई प्रभावशाली पक्ष बार-बार “स्पष्टीकरण” के नाम पर नई याचिकाएँ दाखिल करते हैं, जिससे pendency बढ़ती है।
3. वरिष्ठ न्यायाधीशों पर सवाल और प्रशासनिक निर्णय
उनकी पीठ ने हाल ही में कहा था कि एक “सम्मानित सेवानिवृत्त न्यायिक सदस्य” द्वारा NCLAT के एक मामले में हस्तक्षेप के गंभीर प्रश्न पर फैसला लेना CJI का विशेषाधिकार है। अब यह ज़िम्मेदारी न्यायमूर्ति कांत पर है।
इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि—
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क्या वे हेट स्पीच के आरोप झेल रहे एक हाई कोर्ट न्यायाधीश के मामले में आगे कदम उठाते हैं।
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क्या उनके नेतृत्व में कॉलेजियम महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति पर सहमति बनाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा।
हास्य और मर्यादा पर स्पष्ट रेखा: रणवीर अल्लाहबादिया केस में टिप्पणी
यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया से जुड़े एक मामले में न्यायमूर्ति कांत ने कहा था:
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“हास्य वह है जिसे परिवार साथ बैठकर सुने और असहज न हो। अश्लील भाषा प्रतिभा नहीं है; प्रतिभा है सरल शब्दों से हास्य पैदा करना।”
यह टिप्पणी न्यायपालिका की उस दृष्टि को दर्शाती है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक शिष्टाचार के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है।
उन्होंने अकादमिक अली खां महमूदाबाद के सोशल मीडिया पोस्टों की जांच के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल भी गठित किया था।
महत्वपूर्ण फैसलों का लंबा अनुभव
CJI कांत कई ऐतिहासिक निर्णयों का हिस्सा रहे हैं—
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अनुच्छेद 370 हटाने वाली पीठ
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इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक ठहराने वाला फैसला
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पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई
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राजद्रोह कानून के निलंबन पर सुनवाई
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लखीमपुर खीरी मामले में आशीष मिश्रा को सख्त शर्तों पर अंतरिम जमानत
उनकी न्यायिक यात्रा में संवैधानिक, नागरिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पड़ाव शामिल रहे हैं।
व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
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जन्म: 10 फरवरी 1962, हिसार (हरियाणा)
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7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता (Advocate General) बने
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9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त
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अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने
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2019 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच का हिस्सा बने
उनका कार्यकाल 2 फरवरी 2027 तक रहेगा—यानी लगभग एक वर्ष से कुछ अधिक।
