चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर दोबारा बढ़ा, बाढ़ का खतरा
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर दो दिन पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद रविवार शाम को सामान्य हुआ था, लेकिन सोमवार रात से फिर हुई बारिश से नदी फिर उफान पर आ गई है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | चित्रकूट | 2 सितंबर 2026
धर्मनगरी चित्रकूट में दो दिन पूर्व मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब साढ़े आठ मीटर ऊपर पहुंच गया था, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। रविवार शाम को पानी खतरे के निशान से नीचे आने पर लोगों ने कुछ राहत की सांस ली और अपने घरों से मलबा हटाने का काम शुरू किया। हालांकि, यह राहत क्षणिक साबित हुई, क्योंकि सोमवार रात से लगातार हो रही बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर गया है। प्रशासन ने लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की चेतावनी जारी की है और रामघाट की ओर जाने वाले रास्तों पर आवागमन रोक दिया है।
बारिश के कारण नदी के दोबारा उफनाने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पहले से ही रामघाट के आसपास का क्षेत्र बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित था, और जलस्तर में हुई इस पुनः वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और सफाई का कार्य जारी था, लेकिन नए जलस्तर ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया है।
प्रभारी मंत्री और सांसद ने लिया बाढ़ का जायजा
बाढ़ की गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए चित्रकूट के प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी सोमवार को प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल पर मौजूदा हालात का मुआयना किया और बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन के नियमों के अनुसार पात्र लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, स्थानीय सांसद कृष्णा देवी पटेल ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने रामघाट पर दुकानदारों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना और कर्वी स्थित मंदाकिनी पुल के धंसे हुए एप्रोच मार्ग का भी निरीक्षण किया।
सड़कों और गलियों में अब भी मलबा का ढेर
दो दिन पूर्व आई भीषण बाढ़ ने चित्रकूट शहर में व्यापक तबाही मचाई थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी इसका असर शहर की सड़कों और गलियों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। लगातार दो दिनों तक चले सफाई अभियान के बावजूद, कई स्थानों पर अभी भी भारी मात्रा में मलबा जमा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ गलियों में भरे मलबे के कारण लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। कई निवासी अपने घरों के अंदर ही रहने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अधिकारी संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्यों में रात-दिन जुटे हुए हैं। विभिन्न टीमें मलबा हटाने और सफाई का कार्य निरंतर जारी रखे हुए हैं।
