छात्रों का देशव्यापी विरोध: पुलिस कार्रवाई के खिलाफ और चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग
गुना में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 11 अक्टूबर 2026
डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (DSO) ने देश भर में लोकतांत्रिक आंदोलनों पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसी क्रम में, गुना में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश व्यक्त किया और सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगों को पूरा करने की अपील की। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के अन्य हिस्सों में नागरिक आंदोलनों के दमन के खिलाफ आयोजित किया गया।
संगठन के सदस्यों ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोर-शोर से आवाज उठाई। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और मतदान जैसे बुनियादी अधिकारों के लिए चलाए जा रहे जन आंदोलनों को सरकारी तंत्र द्वारा कुचला जा रहा है।
जनवादी आंदोलनों पर सरकारी दमन का आरोप
DSO की ऑल इंडिया काउंसिल द्वारा घोषित विरोध दिवस के तहत, गुना में छात्रों ने एक संयुक्त रैली निकाली। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं श्रुति शिवहरे और नारायण सिंह चंदेल ने संयुक्त रूप से कहा कि देश में जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की भारी तैनाती का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जनता के खिलाफ एक अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
छात्र नेताओं ने दिल्ली में DSO के मध्य प्रदेश के नेतृत्वकारी पदाधिकारियों, वकीलों, छात्र-छात्राओं और स्वतंत्र मीडिया कर्मियों को हिरासत में लिए जाने की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि जब तक लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा नहीं होगी, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
चेतावनी और भविष्य की रणनीति
गुना की सड़कों पर उतरे युवाओं की बड़ी संख्या ने इस प्रदर्शन को एक महत्वपूर्ण आयाम दिया। छात्रों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और मौजूदा दमनकारी रवैया जारी रहा, तो भविष्य में विरोध प्रदर्शनों का दायरा और अधिक व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर बारीकी से नजर रखी, जबकि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की।
