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चेन्नई में शहरी विकास पर संसदीय समिति की बैठक, सांसद नारोलिया ने की शिरकत

चेन्नई में आवास एवं शहरी कार्य संबंधी संसदीय समिति की बैठक हुई। सांसद माया नारोलिया ने शहरीकरण, आवास व जनकल्याणकारी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।

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चेन्नई में शहरी विकास पर संसदीय समिति की बैठक, सांसद नारोलिया ने की शिरकत

द क्लिफ न्यूज़ | चेन्नई | 1 सितंबर 2026

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने चेन्नई में अपने तीन दिवसीय 'चेन्नई-अंडमान एवं निकोबार' आधिकारिक अध्ययन दौरे के पहले दिन एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस महत्वपूर्ण बैठक में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने समिति के अन्य सदस्यों के साथ भाग लिया।

बैठक के दौरान, समिति के सदस्यों ने देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण, शहरी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत बनाने, सभी के लिए सुलभ आवास और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारियों ने शहरी विकास की वर्तमान स्थिति, योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया और संबंधित चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिए, जिन पर समिति के सदस्यों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं और चर्चा की।

शहरी नियोजन और जनकल्याणकारी योजनाओं पर मंथन

इस अध्ययन दौरे का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की सफल कार्यप्रणालियों को समझना, शहरी नियोजन को अधिक प्रभावी बनाना और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप योजनाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहरों को आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने इस अध्ययन दौरे को इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में अत्यंत सहायक बताया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि शहरी विकास की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्रभावी नीतिगत ढांचे और जमीनी स्तर पर सुचारू क्रियान्वयन की आवश्यकता है। अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्तुतीकरणों से समिति को शहरी विकास की प्रगति और उसमें आने वाली बाधाओं को समझने में मदद मिली। समिति ने इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया कि कैसे मौजूदा शहरी आधारभूत संरचनाओं को और मजबूत किया जाए ताकि वे बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव का सामना कर सकें। जन-आवासन (affordable housing) की उपलब्धता सुनिश्चित करना और नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारना भी चर्चा के प्रमुख बिंदु रहे।

नीतिगत सुधार और कार्यान्वयन की चुनौतियां

संसदीय स्थायी समिति के सदस्यों ने शहरी विकास से जुड़ी मौजूदा नीतियों की प्रभावशीलता का आकलन किया और भविष्य के लिए आवश्यक नीतिगत सुधारों पर भी विचार-विमर्श किया। अधिकारियों ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे कि भूमि अधिग्रहण, अवसंरचना विकास की गति, वित्तीय प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता, पर प्रकाश डाला। इन चुनौतियों के समाधान के लिए समिति ने विभिन्न राज्यों की सफलताओं से सीख लेने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। सांसदों ने इस बात पर बल दिया कि योजनाओं का कार्यान्वयन केवल कागजों पर न रहे, बल्कि उसका धरातल पर स्पष्ट प्रभाव दिखना चाहिए।

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि शहरीकरण की प्रक्रिया को समावेशी बनाना महत्वपूर्ण है, ताकि समाज के सभी वर्गों को विकास का लाभ मिल सके। विशेष रूप से, निम्न-आय वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने की योजनाओं की समीक्षा की गई। सांसद नारोलिया ने जोर दिया कि इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अध्ययन दौरे से प्राप्त अंतर्दृष्टि भविष्य की शहरी विकास रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भविष्य की रणनीतियां और आगे का रास्ता

चेन्नई में संपन्न हुई इस उच्चस्तरीय बैठक ने संसदीय स्थायी समिति के अध्ययन दौरे की शुरुआत को चिन्हित किया। आगामी दिनों में, समिति अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का दौरा करेगी, जहाँ वहाँ की विशिष्ट शहरी विकास संबंधी आवश्यकताओं और चुनौतियों का अध्ययन किया जाएगा। इस दौरे के माध्यम से प्राप्त अनुभव और सुझावों को संकलित कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे संसद में प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि वे शहरी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और नई पहलों को अपनाने के लिए तैयार हैं। समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के शहरी क्षेत्र भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित हों, जो नागरिकों के लिए एक बेहतर और सुगम जीवन सुनिश्चित कर सके। इस प्रक्रिया में, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को एकीकृत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।