चार बच्चों की हत्यारी माँ को उम्रकैद, पति सबूतों के अभाव में बरी
मंदसौर की गरोठ अदालत ने चार बच्चों की कुएं में डुबोकर हत्या करने वाली माँ सुगना बाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सबूतों के अभाव में पिता रोडू सिंह बरी हो गया।

संवाददाता: राजकुमार कोटवार
द क्लिफ न्यूज़ | मंदसौर | 4 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ अदालत ने एक सनसनीखेज मामले में चार मासूम बच्चों की निर्मम हत्या करने वाली माँ सुगना बाई बंजारा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश निरंजन पांचाल ने बुधवार को यह फैसला सुनाते हुए महिला पर प्रत्येक बच्चे की हत्या के लिए अलग-अलग आजीवन कारावास और 2-2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, घटना के समय अनुपस्थित होने और सबूतों के अभाव के चलते सुगना बाई के पति रोडू सिंह बंजारा को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।
सरकारी वकील दिलीप नरवाल ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए मजबूत तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सुगना बाई को चारों बच्चों की हत्या का दोषी पाया। हालांकि, पति रोडू सिंह बंजारा के वकील तूफ़ान सिंह सिसौदिया ने तर्क दिया कि पुलिस ने उनके मुवक्किल को गलत तथ्यों के आधार पर आरोपी बनाया था। घटना के समय रोडू सिंह कमल के फूल बेचने के लिए बाहर गया हुआ था और उसका इस जघन्य कृत्य से कोई लेना-देना नहीं था। पुलिस ने रोडू सिंह को जोधपुर से गिरफ्तार किया था, लेकिन न्यायालय में प्रभावी पैरवी के बाद उसे बरी कर दिया गया।
चौंकाने वाली घटना का विवरण
यह दिल दहला देने वाली घटना 14 जुलाई 2024 को गरोठ तहसील के पीपलखेड़ा गांव में घटित हुई थी। सुबह करीब 6 बजे, 40 वर्षीय सुगना बाई बंजारा ने अपने चार बच्चों - बंटी (9 वर्ष), अनुष्का (7 वर्ष), मुस्कान (4 वर्ष) और कार्तिक (2 वर्ष) - को खेत में स्थित कुएं में धकेल दिया था। इसके बाद उसने स्वयं भी कुएं में छलांग लगा दी थी। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुगना बाई को कुएं से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था, लेकिन चारों मासूम बच्चे पानी में डूबने के कारण दम तोड़ चुके थे।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, घटना से पहले पति-पत्नी के बीच आए दिन शराब पीकर मारपीट और घरेलू विवाद होता रहता था। इसी पारिवारिक कलह के चलते सुगना बाई ने यह भयानक कदम उठाया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और सुगना बाई को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। न्यायालय के इस निर्णय ने जहां एक ओर निर्दोष पति को राहत प्रदान की है, वहीं दूसरी ओर बच्चों की हत्यारी माँ को उसके अपराध की सजा सुनाई है।
