चंडीगढ़: बंदी सिखों की रिहाई के लिए प्रदर्शन, राजभवन कूच रोकने को पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले
चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान शनिवार को तनाव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों के राजभवन कूच करने के प्रयास को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इसी बीच, पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान मरीज बनकर राजभवन पहुंचने की कोशिश में हिरासत में लिए गए।

द क्लिफ न्यूज़ | चंडीगढ़ | 15 अगस्त 2026
देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, चंडीगढ़ में बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर आयोजित एक प्रदर्शन ने शनिवार को तवानपूर्ण मोड़ ले लिया। कौमी इंसाफ मोर्चा के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने राजभवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस घटना के बीच, शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान को कथित तौर पर मरीज के भेष में राजभवन के पास पहुंचने के प्रयास में हिरासत में लिया गया।
यह प्रदर्शन बंदी सिखों की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर किया जा रहा था। इन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कुछ बंदी अपनी निर्धारित सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं और उन्हें अब रिहा किया जाना चाहिए। हालांकि, इन मामलों में प्रत्येक बंदी की कानूनी स्थिति, सजा, अपील और संबंधित सरकारों या अदालतों के आदेश भिन्न-भिन्न हैं, जिससे रिहाई को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।
मरीज बनकर राजभवन पहुंचने की कोशिश में सिमरनजीत सिंह मान हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला जब पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान, अपनी पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर चेहरे पर पट्टियां बांधे एक मरीज के वेश में एक वाहन से राजभवन के करीब पहुंचे। राजभवन और आसपास के इलाकों में पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिसकर्मियों को वाहन और उसमें बैठे व्यक्ति की गतिविधियों पर संदेह हुआ। प्रारंभिक जांच के बाद उनकी पहचान उजागर हुई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मान की हिरासत में लिए जाने की खबर से प्रदर्शन स्थल पर हलचल और बढ़ गई, और प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के प्रति दृढ़ता दिखाई।
राजभवन की ओर मार्च रोकने के लिए पुलिस की कार्रवाई
कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र होने का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारी निर्धारित क्षेत्र से आगे बढ़कर राजभवन की ओर मार्च करने पर अड़े थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच गतिरोध बढ़ा और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने और उन्हें नियंत्रित करने के उद्देश्य से आंसू गैस के गोले दागे। इस कार्रवाई से कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य राजभवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
किन बंदी सिखों की रिहाई की मांग?
प्रदर्शनकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर विभिन्न बंदी सिखों की रिहाई की मांग की जाती रही है। इनमें जगतार सिंह हवारा, बलवंत सिंह राजोआना, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्योरा, देविंदरपाल सिंह भुल्लर, गुरदीप सिंह खेड़ा, लखविंदर सिंह लक्खा, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं। इन व्यक्तियों में से कई आतंकवाद, हत्या और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं और लंबे समय से विभिन्न जेलों में सजा काट रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इनमें से कुछ ने अपनी कानूनी रूप से निर्धारित सजा की अवधि पूरी कर ली है और उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में कानूनी प्रक्रियाएं जटिल हैं। प्रत्येक बंदी की सजा की अवधि, अपील की स्थिति, अदालती आदेश और सरकारों द्वारा विचार की गई क्षमादान या रिहाई की शर्तें अलग-अलग हैं। इस प्रकार, रिहाई का निर्णय पूरी तरह से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर ही निर्भर करेगा।
स्वतंत्रता दिवस पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए इस प्रदर्शन के मद्देनजर, चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती। राजभवन और शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी। पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। प्रशासन का मुख्य ध्यान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने पर केंद्रित था। इस प्रदर्शन ने चंडीगढ़ की राजनीति में बंदी सिख रिहाई के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है, जो लंबे समय से एक संवेदनशील विषय रहा है। कौमी इंसाफ मोर्चा और इससे जुड़े संगठन इस मुद्दे को लेकर अपने आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
