चंबल में अहिंसा का नया स्वर: राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई का मुरैना दौरा
प्रख्यात गांधीवादी चिंतक राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई 28 जुलाई को मुरैना पहुंचेंगे। उनका लक्ष्य चंबल को पीस टूरिज्म का केंद्र बनाना और समाज की...

द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 27 जुलाई 2026
देश के प्रख्यात गांधीवादी चिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता और महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अध्यक्ष राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई मंगलवार, 28 जुलाई को अल्प प्रवास पर मुरैना पहुंचेंगे। उनका यह दौरा चंबल अंचल को अहिंसा, सामाजिक न्याय और पीस टूरिज्म की नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दौरान वे स्थानीय सामाजिक संगठनों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और गांधीवादी कार्यकर्ताओं के साथ व्यापक संवाद करेंगे।
राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई का मानना है कि 14 अप्रैल 1972 को हुआ ऐतिहासिक चंबल दस्यु समर्पण इस क्षेत्र की नियति को बदलने में मील का पत्थर साबित हुआ। कभी बागियों, बीहड़ों और बंदूक की पहचान से चर्चित रहने वाला चंबल अंचल आज अहिंसा और शांति के अनूठे प्रयोगों के कारण देश-दुनिया में सम्मान प्राप्त करता है। वे मानते हैं कि यही ऐतिहासिक विरासत चंबल को विश्व स्तरीय पीस टूरिज्म के केंद्र के रूप में स्थापित करने का एक मजबूत आधार बन सकती है।
समाज में हिंसा की विभिन्न परतों का समाधान
राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई के अनुसार, दस्यु समर्पण ने यद्यपि हिंसा के एक स्वरूप को समाप्त किया, तथापि समाज में आज भी हिंसा अनेक रूपों और विभिन्न परतों में व्याप्त है। रेत की हिंसा, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों पर संघर्ष, महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार, सामाजिक असमानता, विस्थापन और वंचित समुदायों का शोषण जैसी चुनौतियां आज भी समाज के समक्ष खड़ी हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि इन सभी परतों को अहिंसा, संवाद, संवेदनशीलता और जनसहभागिता के माध्यम से समाप्त करना ही सच्चे अर्थों में शांति स्थापित करने का एकमात्र मार्ग है।
अहिंसा विद्यालय और शांति सेना का गठन
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए, राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई चंबल अंचल में 'अहिंसा विद्यालय' की स्थापना के प्रयासों को बल दे रहे हैं। यह प्रस्तावित संस्थान गांधीवादी विचारों, अहिंसा, सामाजिक समरसता, नेतृत्व निर्माण और रचनात्मक कार्यों का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां नई पीढ़ी को समाज में शांति और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, समाज के हर वर्ग को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से 'शांति सेना' के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, जिसमें युवाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
वंचित समुदायों के अधिकारों पर जोर
राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई विशेष रूप से चंबल नदी के किनारे निवास करने वाले केवट-मल्लाह समुदाय, आदिवासी समाज, तथा गरीब एवं बेरोजगार युवाओं के जीवन, आजीविका और अधिकारों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। उनका मत है कि क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय एवं वंचित समुदायों का न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वे शासन-प्रशासन और समाज के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करते हुए विस्थापन, पुनर्वास और आजीविका से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल के समर्थक हैं।
अपने अल्प प्रवास के दौरान, राजागोपाल पी. व्ही. राजू भाई सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और युवाओं के साथ बैठकर आगामी तीन माह की एक विस्तृत कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श करेंगे। इसका उद्देश्य चंबल में अहिंसा विद्यालय, पीस टूरिज्म, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी के इस अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करना है।
