BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Health

इबोला वैक्सीन के जल्द विकास के लिए CEPI ने मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड को दिए 60 मिलियन डॉलर

इबोला के खतरनाक बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से निपटने के लिए वैक्सीन के तेजी से विकास हेतु CEPI ने मॉडर्ना, ऑक्सफोर्ड और IAVI को 60 मिलियन डॉलर...

Jun 2
4 मिनट में पढ़ें
इबोला वैक्सीन के जल्द विकास के लिए CEPI ने मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड को दिए 60 मिलियन डॉलर

मुख्य सारांश (Top Summary)

  • क्या हुआ: CEPI ने इबोला के घातक ‘बुंडिबुग्यो’ स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन के तेजी से विकास के लिए मॉडर्ना, ऑक्सफोर्ड और IAVI को लगभग 60 मिलियन डॉलर का फंड दिया है।
  • यह क्यों महत्वपूर्ण है: वर्तमान में इस खास स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है, जिसने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा कर दी है।
  • क्या बदलेगा: वैक्सीन उम्मीदवार अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहे हैं और अगले कुछ महीनों के भीतर क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकते हैं।
  • कौन प्रभावित है: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा के समुदाय, जहां अब तक कुल 290 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

वैश्विक गठबंधन ने वैक्सीन के तेजी से विकास के लिए दिया फंड

महामारी की तैयारियों के लिए बने वैश्विक गठबंधन गठबंधन फॉर एपिडेमिक प्रिपर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) ने घातक इबोला बुंडिबुग्यो (BDBV) वायरस के खिलाफ वैक्सीन विकास को तेज करने के लिए लगभग 60 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है। यह वायरस इस समय कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में पैर पसार रहा है।

CEPI के प्रमुख रिचर्ड हैचेट ने संकेत दिया है कि वैक्सीन उम्मीदवार अगले कुछ महीनों के भीतर इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकते हैं। फिलहाल इस खास स्ट्रेन के लिए कोई भी स्वीकृत इलाज या वैक्सीन मौजूद नहीं है।

कांगो में मौजूदा स्वास्थ्य संकट के कारण अब तक 282 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 42 मौतें हुई हैं, जबकि लगभग 1,100 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। वहीं, पड़ोसी देश युगांडा में भी नौ मामलों और एक मौत की पुष्टि हुई है।

एमआरएनए (mRNA) ट्रायल के लिए मॉडर्ना को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

CEPI ने मॉडर्ना की संभावित बुंडिबुग्यो (BDBV) वैक्सीन के प्रीक्लिनिकल और शुरुआती क्लिनिकल विकास के लिए 50 मिलियन डॉलर तक का फंड आवंटित किया है। इस फंडिंग का उद्देश्य शुरुआती आंकड़े सकारात्मक होने पर वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ावा देना और उसे अगले चरण के परीक्षणों तक ले जाना है।

मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) ने बताया कि कंपनी का उद्देश्य वैक्सीन की खुराक (डोज) की रणनीति को सरल बनाना है। अभी यह साफ नहीं है कि वैक्सीन के लिए एक खुराक की जरूरत होगी या दो की, जिसका फैसला अफ्रीका में होने वाले फेज-1 ट्रायल में किया जाएगा।

"हमारा उद्देश्य सुरक्षा से समझौता किए बिना जितनी जल्दी हो सके आगे बढ़ना और हर संभव मदद करना है।" - स्टीफन बेंसल, मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी।

ऑक्सफोर्ड, सीरम इंस्टीट्यूट और IAVI भी मुहिम में शामिल

CEPI ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा निर्मित की जा रही वैक्सीन के लिए भी 8.6 मिलियन डॉलर तक का निवेश कर रहा है। यह वैक्सीन उम्मीदवार उसी तकनीक पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन में किया गया था।

इसके अलावा, इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव (IAVI) को शुरुआती तौर पर 3.2 मिलियन डॉलर की राशि दी गई है। IAVI की वैक्सीन एक सिंगल-डोज (एक खुराक वाली) वैक्सीन है, जो मर्क (Merck) की स्वीकृत ‘इरवेबो’ (Ervebo) वैक्सीन के प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है।

तीनों वैक्सीन उम्मीदवारों की तुलना इस प्रकार है:

  • मॉडर्ना वैक्सीन उम्मीदवार: यह एमआरएनए (mRNA) तकनीक पर आधारित शॉट है, जिसका उद्देश्य एक या दो खुराक वाली सरल खुराक प्रणाली तैयार करना है।
  • ऑक्सफोर्ड/सीरम उम्मीदवार (ChAdOx1 Bundibugyo): यह एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन तकनीक पर आधारित है, जिसे तेजी से बड़े पैमाने पर बनाने की क्षमता साबित हो चुकी है।
  • IAVI वैक्सीन उम्मीदवार: यह मर्क की स्थापित इरवेबो तकनीक पर आधारित सिंगल-डोज वैक्सीन है।

ट्रायल का प्रायोजन और लॉजिस्टिक की चुनौतियां

भले ही वैक्सीन का विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन पूर्वी कांगो में सुरक्षा समस्याओं के कारण क्लिनिकल ट्रायल आयोजित करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, इन परीक्षणों के आयोजन की जिम्मेदारी कौन उठाएगा, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

IAVI के सीईओ मार्क फीनबर्ग ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस बार परीक्षणों के प्रायोजन (स्पॉन्सर) की अपनी ऐतिहासिक भूमिका नहीं निभा सकता है, जिसका मतलब है कि इसके नेतृत्व के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे।

"हमें हाल ही में WHO से संकेत मिले हैं कि वे भविष्य में यह जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे।" फीनबर्ग ने कहा कि क्लिनिकल चरण में प्रवेश करने के लिए करोड़ों डॉलर की आवश्यकता होगी।

इसके अलावा, वैश्विक वैक्सीन गठबंधन 'गावी' (Gavi) ने इबोला से निपटने के लिए 50 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है, जबकि विश्व बैंक के महामारी कोष (Pandemic Fund) ने 220.6 मिलियन डॉलर तक के अनुदान की घोषणा की है।

आगे क्या देखना होगा

आने वाले महीनों में अफ्रीका में फेज-1 क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत पर नजर रहेगी, जिससे मॉडर्ना की खुराक संबंधी आवश्यकताओं की पुष्टि हो सके।

इसके साथ ही, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां या राष्ट्रीय सरकारें पूर्वी कांगो में परीक्षण आयोजित करने की सुरक्षा और प्रायोजन की चुनौतियों से निपटने के लिए आगे आती हैं या नहीं।