राजकोट हादसे के बाद भोपाल साइबर क्राइम शाखा की चेतावनी: “CCTV कैमरे बन रहे हैं हैकर्स के हथियार”
राजकोट कांड से देशभर में मची सनसनी गुजरात के राजकोट में एक मातृत्व अस्पताल के CCTV सिस्टम को हैक कर महिलाओं के निजी वीडियो इंटरनेट...

राजकोट कांड से देशभर में मची सनसनी
गुजरात के राजकोट में एक मातृत्व अस्पताल के CCTV सिस्टम को हैक कर महिलाओं के निजी वीडियो इंटरनेट पर लीक कर दिए गए — इस जघन्य साइबर अपराध ने पूरे देश में सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब भोपाल साइबर क्राइम शाखा ने भी नागरिकों को चेताया है कि यदि उन्होंने अपने घर, दुकान, ऑफिस या अस्पताल में लगे कैमरों का पासवर्ड नहीं बदला, तो वे भी हैकरों के निशाने पर हैं।
भोपाल पुलिस की चेतावनी
अतिरिक्त डीसीपी (क्राइम ब्रांच) शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि इस तरह की घटनाओं की मुख्य वजह CCTV सिस्टम का डिफॉल्ट यूज़रनेम और पासवर्ड न बदलना है।
“अक्सर लोग कैमरा इंस्टॉल करने के बाद उसे ‘admin/admin123’ जैसे पासवर्ड पर ही छोड़ देते हैं। हैकर्स इसी कमजोरी का फायदा उठाकर सिस्टम में प्रवेश करते हैं और वीडियो फीड पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं,” उन्होंने कहा।
भोपाल पुलिस का कहना है कि शहर में लगे हजारों CCTV कैमरों में से अधिकतर का पासवर्ड अब तक नहीं बदला गया है, जिससे साइबर सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
कैसे होता है हमला?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, हैकर्स इंटरनेट पर उपलब्ध ओपन-सोर्स टूल्स की मदद से उन कैमरों को स्कैन करते हैं जो कमजोर सुरक्षा सेटिंग्स पर चल रहे होते हैं।
एक बार सिस्टम में घुसने के बाद वे लाइव फीड देख सकते हैं, रिकॉर्डिंग डाउनलोड कर सकते हैं, और चाहें तो कैमरों की दिशा या सेटिंग भी बदल सकते हैं।
“यह डिजिटल युग का नया जासूसी हथियार है — बिना किसी फिजिकल एक्सेस के, अपराधी लोगों की निजी जिंदगी में झाँक सकते हैं,” भोपाल स्थित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अनिल भटनागर ने बताया।
नागरिकों के लिए पुलिस की सलाह
भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने CCTV उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है:
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डिफॉल्ट यूज़रनेम और पासवर्ड तुरंत बदलें।
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पासवर्ड में बड़े-छोटे अक्षर, अंक और प्रतीकों का प्रयोग करें।
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कैमरा सिस्टम का फर्मवेयर नियमित रूप से अपडेट करें।
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पब्लिक वाई-फाई या असुरक्षित नेटवर्क से कैमरा एक्सेस न करें।
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क्लाउड स्टोरेज और मोबाइल ऐप्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम करें।
निजता पर मंडराता खतरा
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल तकनीकी लापरवाही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत गोपनीयता के अधिकार पर हमला है।
भोपाल पुलिस का दावा है कि वे अब CCTV सर्विस प्रदाताओं के साथ मिलकर एक “सुरक्षा ऑडिट ड्राइव” शुरू करने जा रहे हैं, ताकि कमजोर सिस्टमों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाया जा सके।
निष्कर्ष:
राजकोट की घटना ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा केवल बैंकों या सरकारी वेबसाइटों का मामला नहीं, बल्कि हर घर और हर दफ्तर की जिम्मेदारी है।
एक साधारण पासवर्ड बदलना — आपकी निजता, प्रतिष्ठा और सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल बन सकता है।
