बुसान एक्सपो में 'गया से ग्योंगजू' प्रदर्शनी से निखरी भारत-कोरिया की बौद्धिक साझेदारी
बुसान में आयोजित 'बुसान इंटरनेशनल बुद्धिज्म एक्सपो 2026' में भारत ने 'गया से ग्योंगजू: बुद्ध धम्म के ज़रिए भारत-कोरिया दोस्ती' प्रदर्शनी से अपनी बौद्ध विरासत...

द क्लिफ न्यूज़ | बुसान | 11 अगस्त 2026
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित चार दिवसीय प्रतिष्ठित 'बुसान इंटरनेशनल बुद्धिज्म एक्सपो 2026' में भारत ने अपनी गहरी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक छाप छोड़ी है। 'बेक्सको' कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुए इस वैश्विक सांस्कृतिक समागम में दक्षिण कोरिया स्थित भारतीय दूतावास ने सक्रिय रूप से भाग लिया। एक्सपो की मुख्य थीम 'शून्यता और आधुनिक जीवन' के बीच, भारतीय पवेलियन द्वारा प्रस्तुत 'गया से ग्योंगजू: बुद्ध धम्म के ज़रिए भारत-कोरिया दोस्ती' नामक विशेष प्रदर्शनी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही।
दक्षिण कोरिया में भारतीय दूतावास ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर प्रदर्शनी की तस्वीरें साझा करते हुए इस पहल को 'साझा बौद्ध विरासत का सफ़र' बताया। दूतावास के अनुसार, इस प्रदर्शनी ने भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को कोरियाई दर्शकों के करीब पहुंचाया और बौद्ध धर्म की जन्मभूमि भारत के प्रति उनकी रुचि को बढ़ाया।
सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने का प्रयास
इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य भारत के पवित्र 'बुद्ध सर्किट' से लेकर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रदर्शित करना था। प्रदर्शनी में 'गया' (कोरिया का प्राचीन गया साम्राज्य, जिसका संबंध भारत के अयोध्या से माना जाता है) से लेकर दक्षिण कोरिया की आध्यात्मिक राजधानी 'ग्योंगजू' (शिल्ला राजवंश का केंद्र) तक के ऐतिहासिक सफर को रेखांकित किया गया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कैसे 'बुद्ध धम्म' ने हजारों वर्षों से दोनों देशों के दिलों को जोड़ रखा है।
आध्यात्मिक पर्यटन और युवा जुड़ाव
सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, इस कार्यक्रम ने कोरियाई नागरिकों और वैश्विक आगंतुकों के बीच भारत के बौद्ध तीर्थस्थलों का दौरा करने और 'आध्यात्मिक भारत' का अनुभव करने के प्रति भारी उत्सुकता जगाई। एक्सपो में आए युवाओं और बौद्ध भिक्षुओं ने भारत की प्राचीन ध्यान परंपराओं, कला और ऐतिहासिक कूटनीतिक कड़ियों को करीब से समझा। यह प्रदर्शनी वर्तमान समय में, जब दोनों देश आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर सहयोग बढ़ा रहे हैं, 'बुद्ध धम्म' के साझा कूटनीतिक पुल के माध्यम से उनके संबंधों को एक मजबूत भावनात्मक और ऐतिहासिक आधार प्रदान करती है।
